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लॉकडाउन: साहब मुझे कोरोना तो नहीं, स्पेशल फ्लू कैंप पहुंच बोला संदिग्ध, दस दिन से आ रही है खांसी
Tue, 31 Mar 2020 07:08 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रूखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रूखाबाद
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 31 Mar 2020 07:08 PM IST
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कोरोना संदिग्ध को चार घंटे बाद लेने पहुंची एंबुलेंस
- फोटो : amar ujala
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फर्रूखाबाद के कायमगंज क्षेत्र के गांव इनायत नगर में नोएडा से आया 23 वर्षीय युवक खुद ही सीएचसी से स्पेशल फ्लू कैंप पहुंचा। डाॅक्टरों से कहा कि साहब दस दिन से खांसी आ रही है कहीं कोरोना तो नहीं। चार घंटे बाद पहुंची एंबुलेंस से उसे लोहिया अस्पताल भेजा गया। गांव इनायत नगर निवासी युवक नोएडा में एक कारखाने में काम करता है।
स्क्रीनिंग करते डॉक्टर
- फोटो : amar ujala
रविवार को वह अपने गांव पहुंचा। 10 दिन से उसे खांसी आ रही है। 3 दिन पहले बुखार भी आ गया। इस पर वह खुद सीएचसी पहुंचा। वहां से डॉक्टर ने उसे स्पेशल फ्लू कैंप भेज दिया। ओपीडी में मौजूद डॉक्टरों ने थर्मल स्क्रीनिंग की और कोरोना होने का संदेह जताया।
बाहर से लाैटने वालों की हुई स्क्रीनिंग
- फोटो : amar ujala
इसके बाद उसे आइसोलेशन वार्ड में लिटा दिया गया। 11 बजे एंबुलेंस को काॅल किया गया। 3 बजे एंबुलेंस पहुंची। तब तक व्यवस्थापक डॉ. विकास शर्मा, डॉ. जेयू खान, डॉ. संतोष शर्मा व कानूनगो सतेंद्र कटियार व सीएचसी के बीपीएम विनय मिश्रा वहीं रुके रहे।
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स्क्रीनिंग के लिए खड़े लोग
- फोटो : amar ujala
एंबुलेंस से उसे लोहिया अस्पताल भेजा गया। इस दौरान सभी निजी चिकित्सकों ने स्वास्थ्य सेवाओं पर तमाम सवाल भी खड़े किए। कोरोना संदिग्ध युवक काफी देर लाइन लगाकर चिकित्सकों के पास पहुंचा। इस दौरान वह काफी लोगों के संपर्क में भी आया। एंबुलेंस के ईएमटी (इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन) स्टॉफ प्रेमचंद्र ने बताया कि उनके पास पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) नहीं है। अभी सीएचसी से ग्लब्स आदि दिए गए हैं।
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मरीज की जांच करते डॉक्टर
- फोटो : amar ujala
मंगलवार से कई मांगों को लेकर मेडिकल स्टॉफ कार्य बहिष्कार पर हैं, इस लिए आने में देरी हुई है। चिकित्साधीक्षक डॉ. अनुराग सिंह ने बताया ऐसे लोगों को खुद ही बचाव रखने की जरूरत है। खुद बचें और दूसरों को भी बचाएं। घर में ही खुद को आइसोलेट करें। जरूरत होने पर सीएचसी पर कॉल करें टीम घर पहुंचेगी। इस युवक को फ्लू कैंप में नहीं जाना चाहिए था। उसे वहां भेजा भी नहीं गया था।