उन्नाव कांड : पीड़िता के चाचा ने भाजपा विधायक, भाई व पुलिस अफसरों की हर काॅल का ब्योरा सुरक्षित रखा
चाचा ने अफसरों से लेकर विधायक और उनके भाई से हुई हर फोन काॅल की रिकार्डिंग को सुरक्षित रखा। इसी मोबाइल में व्हाट्सएप, ट्वीटर और फेसबुक के जरिए अपनी बात अधिकारियों और मीडिया तक पहुंचाई। मोबाइल के इन सबूतों के चलते ही विधायक पर पाक्सो एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। सीबीआई ने भी काॅल रिकार्डिंग की कॉपी कब्जे में ली हैं।
दिल्ली में रहकर कारोबार करने वाले चाचा ने वहीं रह कर लखनऊ के उच्चाधिकारियों के अलावा उन्नाव के सीओ, एसपी के पीआरओ, माखी थाने के एसओ, हल्का इंचार्ज के साथ ही विधायक, उनके भाई, मारपीट व एफआईआर दर्ज करने वाले विधायक के गुर्गों तक से बार-बार बात की। इन फोन काल ने घटना की वजह, मुकदमा दर्ज न होने के पीछे सत्ता पक्ष के विधायक के दबाव, तहरीर में बदलाव के पीछे की वजहों की कलई खोल दी।
3 अप्रैल को किशोरी के पिता के साथ की गई मारपीट और उसी को तमंचा रखने और मारपीट के आरोप में जेल भेजने और न्यायिक हिरासत में मौत होने की सूचना को सोशल मीडिया में पहुंचाकर न्याय की लड़ाई को मजबूत किया। किशोरी के चाचा ने बताया कि उसकी कहीं नहीं सुनी जा रही थी। इसके बाद मोबाइल फोन में काॅल रिकार्ड करना, फेसबुक, वाट्सएप , ट्वीटर और फेसबुक चलाना सीखा। एक साल में डेढ़ हजार से ज्यादा ऑडियो क्लिप सुरक्षित कीं।
मोबाइल के अलावा भी एक कॉपी सीडी और पेन ड्राइव में रखीं। किशोरी के चाचा ने बताया कि उसे मालूम था कि कभी भी किसी झूठे मुकदमे में फंसाया जा सकता है। माखी थाने में कई फर्जी मुकदमे दर्ज कराए गए। मई 2017 में बांगरमऊ कोतवाली में उसके और बड़े भाई (किशोरी के पिता) के खिलाफ जानलेवा हमले का एक मुकदमा दर्ज करा दिया गया।