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उन्नाव कांड: बाहुबली कुलदीप की दबंगई के आगे नतमस्तक रहती थी पुलिस, भाई ने एसएसपी पर चलाई थी गोली
Fri, 02 Aug 2019 02:59 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
यूपी डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 02 Aug 2019 02:59 AM IST
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कुलदीप सेंगर
- फोटो : सोशल मीडिया
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उन्नाव मे किशोरी से दुष्कर्म के आरोप में जेल में बंद विधायक के भाई पर 18 जुलाई 2004 में तत्कालीन एएसपी रामलाल वर्मा को गोली मारने का आरोप लगा था। एएसपी की तहरीर पर गंगाघाट थाने में विधायक के भाई समेत 20 लोगों पर जानलेवा हमला, 7 क्रिमिनल एक्ट में रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी।
विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
हालांकि चार्जशीट लगने के बाद मुकदमे की फाइल ही गायब हो गई। जिससे मामला रफा दफा हो गया। एएसपी को गोली मारने के आरोपी व विधायक का भाई किशोरी के पिता की हत्या के आरोप में इस समय जेल में है।
कुलदीप सिंह सेंगर
वर्ष 2004 में गंगाघाट क्षेत्र में खनन के एक मामले की जांच करने पहुंचे एएसपी रामलाल को गोली मार दी गई थी। इसमें विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सिंह समेत 20 लोगों पर रिपोर्ट दर्ज हुई थी। हालांकि चार्जशीट लगने के बाद इस घटना की केस डायरी ही गायब हो गई थी।
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कुलदीप सिंह सेंगर
2018 में जब विधायक कुलदीप पर दुष्कर्म व दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हत्या कराने के आरोप लगे थे तब एएसपी कांड फिर चर्चा में आया था। सीबीआई ने भी इस मामले की जानकारी ली थी। जिसमें पुलिस अधिकारियों का कहना था कि केस डायरी गायब होने की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। जांच जघन्य अपराध शाखा से हो रही है। एसपी एमपी वर्मा ने बताया कि उस मुकदमे की जानकारी नहीं है।
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आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, सहआरोपी शशि सिंह
- फोटो : अमर उजाला
आईपीएस को लगानी पड़ी आरटीआई
जिन एएसपी रामलाल वर्मा को गोली मारी गई थी, उन्हें आईपीएस संवर्ग मिल चुका है। अपने केस की जानकारी जब उन्होंने की तो उन्हें पता चला कि केस डायरी गायब हो गई है। केस डायरी न मिलने पर उन्होंने जब जानकारी मांगी तो उन्हें जवाब नहीं मिला। इस पर उन्हें आरटीआई की मदद लेनी पड़ी थी।
जिन एएसपी रामलाल वर्मा को गोली मारी गई थी, उन्हें आईपीएस संवर्ग मिल चुका है। अपने केस की जानकारी जब उन्होंने की तो उन्हें पता चला कि केस डायरी गायब हो गई है। केस डायरी न मिलने पर उन्होंने जब जानकारी मांगी तो उन्हें जवाब नहीं मिला। इस पर उन्हें आरटीआई की मदद लेनी पड़ी थी।