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'नीरज' के बर्थडे पर जानें उनकी 'नशीली कविता' और 'लरजती आवाज' के जादू का ये किस्सा
शिखा पांडेय, कानपुर
Updated Thu, 04 Jan 2018 03:25 PM IST
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गोपाल दास नीरज
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लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार विजेता। लिखे जो खत तुझे..., ये भाई जरा देख के चलो..., मेघा छाए आधी रात.. जैसे सदाबहार नगमों के रचयिता यूपी के लाल का आज जन्मदिन है। यहां बात हो रही है साहित्यकार, शिक्षक व दिल को छू लेने वाली कविताओं के लेखक, यूपी के इटावा निवासी गोपालदास नीरज की। प्रतिभाओं के धनी नीरज के बारे में जानें ये बाते....
नशीली कविता व लरजती आवाज के दीवाने श्रोता
गोपाल दास नीरज
नीरज जी जब मंच से अपनी कविताएं सुनाते हैं तो उनकी नशीली कविताएं और लरजती आवाज श्रोताओं को अपना दीवाना बना देती है।
अब के सावन में शरारत ये मेेरे साथ हुई, मेरा घर छोड़ कर सारे शहर में बरसात हुई... सुनकर तो श्रोता सावन की तरह झूम उठते हैं।
अब के सावन में शरारत ये मेेरे साथ हुई, मेरा घर छोड़ कर सारे शहर में बरसात हुई... सुनकर तो श्रोता सावन की तरह झूम उठते हैं।
3 बार मिला फिल्म फेयर पुरस्कार
गोपाल दास नीरज
फिल्म जगत में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिए नीरज जी को 1970 के दशक में लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया।
- 1970 में काल का पहिया घूमे रे भइया, फिल्म- चंदा और बिजली
- 1971 में बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं, फिल्म- पहचान
- 1972 में ये भाई जरा देख के चलो, फिल्म- मेरा नाम जोकर
- 1970 में काल का पहिया घूमे रे भइया, फिल्म- चंदा और बिजली
- 1971 में बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं, फिल्म- पहचान
- 1972 में ये भाई जरा देख के चलो, फिल्म- मेरा नाम जोकर
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ये पुरस्कार व सम्मान भी मिले
गोपाल दास नीरज
- 1991 में भारत सरकार से पद्म श्री
- 1994 में यश भारती
- 2007 में भारत सरकार से पद्म भूषण सम्मान
- 1994 में यश भारती
- 2007 में भारत सरकार से पद्म भूषण सम्मान
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प्रमेख कृतियां
गोपाल दास नीरज
संघर्ष, अंतर्ध्वनि, विभावरी, प्राणगीत, दर्द दिया है, बादर बरस गयो, दो गीत, नीरज की पाती, गीत भी अगीत भी, आसावरी, नदी किनारे, लहर पुकारे, कारवां गुजर गया, फिर दीप जलेगा, तुम्हारे लिए, नीरज की गीतिकाएं।