किडनी कांड में हर रोज चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस रैकेट को ध्वस्त करते हुए एसआईटी ने फरीदाबाद के फोर्टिस हॉस्पिटल की कोऑर्डिनेटर सोनिका डबास को गिरफ्तार कर लिया है। सोमवार को सोनिका दिल्ली से कानपुर आई थी। पूछताछ करने और साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने मंगलवार शाम को उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
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पीएसआरआई अस्पताल के सीईओ डॉ. दीपक शुक्ला गिरफ्तार (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
किडनी कांड में अबतक कुल 12 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। 17 फरवरी को बर्रा पुलिस ने किडनी कांड का खुलासा था। तीन दिन पहले ही पुलिस दिल्ली के पीएसआरआई (पुष्पावती सिंघानिया रिसर्च इंस्टीट्यूट) के सीईओ डॉक्टर दीपक शुक्ला को जेल भेज चुकी है। वहीं अब मामले में दूसरी बड़ी गिरफ्तारी हुई है।
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पीएसआरआई अस्पताल के सीईओ डॉ. दीपक शुक्ला
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एसपी क्राइम राजेश यादव ने बताया कि जांच में तीरथ पाल और अरुण कुमार नाम से किडनी ट्रांसप्लांट की फाइलें मिली थीं। दोनों फाइलें फरीदाबाद के फोर्टिस हॉस्पिटल की थीं। जब फाइलों के दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया तो पता चला था कि दोनों नाम फर्जी हैं और इनके लिए जो डोनर तैयार किए गए थे वो भी फर्जी हैं। एसपी के मुताबिक सोनिका ने ही डोनर प्रोवाइडर व अन्य आरोपियों के साथ मिलकर ये पूरा फर्जीवाड़ा किया। उसके खिलाफ पर्याप्त सुबूत हैं। जिसके आधार पर उसकी गिरफ्तारी की गई।
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पीएसआरआई अस्पताल के सीईओ डॉ. दीपक शुक्ला
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बताते चलें कि किडनी कांड की जांच कर रही क्राइम ब्रांच की टीम ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच के मुताबिक लगभग 90 फीसदी किडनी-लिवर ट्रांसप्लांट के केसों में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। फर्जीवाड़ा के जरिए डोनर प्रोवाइडर, हॉस्पिटल के कोऑर्डिनेटर, डॉक्टर और प्रशासनिक अधिकारी कारोड़ों रुपये कमा रहे हैं।
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किडनी कांड के आरोपी डॉ. दीपक शुक्ला के पकड़े जाने के बाद पुलिस ने किए चौकाने वाले खुलासे
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क्राइम ब्रांच जांच का दायरा बढ़ा सकती है। एसपी क्राइम राजेश यादव ने बताया कि पीएसआरआई हॉस्पिटल में हर महीने 5-6 और साल में 60-65 किडनी ट्रांसप्लांट के केस होते हैं। 12 से 15 मरीजों का लिवर ट्रांसप्लांट होता है। ट्रांसप्लांट में लाखों का खर्च आता है। ऐसे में बड़े लोग (कारोबारी, अधिकारी, सफेदपोश) ही इसका खर्च उठा सकते हैं।