कश्मीर से कन्याकुमारी तक 'एक भारत' का संदेश देने के लिए कनपुरिया लड़का निकला अखंड यात्रा पर
- कानपुर के रावतपुर निवासी है देवांश बाजपेई, दिल्ली से स्नातक किया
- 2 जून 2018 को दिल्ली से शुरू की यात्रा, जून के अंतिम सप्ताह में कानपुर में पूरा होगा मिशन
- पिता दीपक बाजपेई कलेक्ट्रेट में चीफ कैशियर और गीता बाजपेई गृहणी
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बड़ी- बहन का सबसे अधिक सपोर्ट
देवांश ने बताया मां गीता हमेशा कुछ अलग, नया करने को प्रेरित करती हैं। वहीं बड़ी बहन ज्योत्सना भी हौसला बढ़ाती हैं। इसलिए पापा दीपक बाजपेई भी सपोर्ट करते हैं। बताया कि वह घर के अकेले बेटे हैं। सपना है कि वह बाइक से ही पूरा देश घूमकर भारत एक का संदेश दें।
प्रोफाइल --
नाम - देवांश बाजपेई (दिल्ली में अध्यनरत)
कानपुर में शिक्षा - वुडबाइन गाडेऱि््नया (कल्याणपुर,कानपुर)
स्नातक - दिल्ली विश्वविद्धालय (2015-18)
जॉब - रॉयल बैंक ऑफ स्काट्लैंड में ऑपरेशनल ऐनालिस्ट में चयन
रुचि - मोटरसाइकल और कार चलाना, तबला बजाना।
पिता - दीपक बाजपेई (कानपुर कलेक्ट्रेट में चीफ कैशियर)
मां - गीता बाजपेई ( गृहणी)
बड़ी बहन - ज्योत्सना बाजपेई
पूर्व की उपलब्धि - (20 जून 2017) लेह - लद्दाख को इसी मोटरसाइकल से विश्व की सबसे ऊंची सड़क (3680 किलोमीटर यात्रा) से पूरी कर खारदूगल टॉप पहुंचे। वहां से 4 जुलाई 2018 वापस लौटे।
भविष्य का लक्ष्य - मोटर साइकिल से पूरा भारत घूमना।
- देवांश बाजपेई की यह यात्रा 2 जून 2018 को दिल्ली से शुरू होकर 9 जून को श्रीनगर होकर दिल्ली पहुंची। , श्री नगर से दिल्ली का रास्ता 860 किलोमीटर एक दिन में तय किया। वह रोज बाइक से 500-800 किलोमीटर चलने का लक्ष्य पूरा कर रहे हैं। कहते हैं वह रात को ही यात्रा करते हैं।