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आरजू हत्याकांड: माथे, कंधे पर चोट के जख्म, होंठ फटे, शरीर भर में खरोंच, आंखों में भर आया था खून
Tue, 29 Dec 2020 10:36 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 29 Dec 2020 10:36 AM IST
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इंजीनियर आरजू गुप्ता (मृतका)
- फोटो : अमर उजाला
माथे और कंधे पर चोट के जख्म। दोनों होंठ फटे हुए और शरीर भर में खरोंच के निशान इंजीनियर आरजू गुप्ता पर बर्बरता की गवाही दे रही हैं। इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ है। शरीर पर खरोंच के निशान व जख्मों से साबित होता है कि आखिर वक्त तक आरजू जान बचाने के लिए लड़ी थी।
पति के साथ इंजीनियर आरजू गुप्ता (मृतका)
- फोटो : अमर उजाला
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार आरजू के माथे, गाल, कंधे पर चोट के निशान मिले। आखों में खून उतर आने से लालपन था। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि आरजू का मुंह किसी चीज से ढककर जोर से दबाया गया। इससे उसके होंठ अंदर, बाहर फट गए और आंखों में खून उतर आया।
इंजीनियर आरजू गुप्ता (मृतका)
- फोटो : amar ujala
माथे, कंधे और गाल पर जख्म से यह माना गया कि उसने मौत से पहले काफी संघर्ष किया था। दम घुटने से उसके फेफड़ों का वजन भी बढ़ गया था। चेहरा किसी चीज से दबाए जाने पर आरजू जोर-जोर से सांस लेने का प्रयास करती रही। इसके चलते उसके फेफड़ों का वजन बढ़ गया। मौत के बाद नाखून, होंठ और चेहरा नीला पड़ गया।
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नौबस्ता गहोई भवन में आरजू गुप्ता की दुखी मां अर्चना परिवार के साथ
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे हुआ हत्या का खुलासा
विशेषज्ञों ने बताया कि आरजू की मौत स्मोदरिंग (दम घुटने से मौत) से हुई। इसमें नाक का टिप (नथुने) दबने से पिचक जाते हैं। चेहरा दबाने से मुंह के आस-पास व होंठ के अंदर बाहर और मसूड़ों में चोेट के निशान पाए जाते हैं। आखों में लालपन पाया जाता है। ऐसे ही चोट और निशान पोस्टमार्टम के दौरान आरजू में भी पाए गए थे। आरजू के फेफड़े का वजन भी बढ़ गया था। इसी आधार पर डॉक्टरों ने आरजू की मौत की वजह स्मोदरिंग लिखी है।
विशेषज्ञों ने बताया कि आरजू की मौत स्मोदरिंग (दम घुटने से मौत) से हुई। इसमें नाक का टिप (नथुने) दबने से पिचक जाते हैं। चेहरा दबाने से मुंह के आस-पास व होंठ के अंदर बाहर और मसूड़ों में चोेट के निशान पाए जाते हैं। आखों में लालपन पाया जाता है। ऐसे ही चोट और निशान पोस्टमार्टम के दौरान आरजू में भी पाए गए थे। आरजू के फेफड़े का वजन भी बढ़ गया था। इसी आधार पर डॉक्टरों ने आरजू की मौत की वजह स्मोदरिंग लिखी है।
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आरजू हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
हर गैस शरीर पर छोड़ जाती है अपने निशान
विशेषज्ञों के मुताबिक हर गैस इंसानी शरीर पर अपने निशान छोड़ जाती है। आरजू के शरीर पर ऐसे कोई निशान अंदर या बाहर नहीं पाया गया जिससे यह साबित हो सके कि गीजर की गैस या भाप से उसकी मौत हुई है। आमतौर पर कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस (बंद कमरे में आग जलाने से) से दम घुटने लगता है। इससे शरीर का रंग चेरीरेड हो जाता है। शरीर के भीतर के आर्गन भी कलर्ड हो जाते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक हर गैस इंसानी शरीर पर अपने निशान छोड़ जाती है। आरजू के शरीर पर ऐसे कोई निशान अंदर या बाहर नहीं पाया गया जिससे यह साबित हो सके कि गीजर की गैस या भाप से उसकी मौत हुई है। आमतौर पर कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस (बंद कमरे में आग जलाने से) से दम घुटने लगता है। इससे शरीर का रंग चेरीरेड हो जाता है। शरीर के भीतर के आर्गन भी कलर्ड हो जाते हैं।