कानपुर में संजीत की अपहरण के बाद हत्या करने वाले आरोपी बड़े ही शातिर निकले। उन्होंने अपहरण की साजिश तो पहले ही रच डाली थी लेकिन उन्हें तलाश थी तो बस सुरक्षित ठिकाने की जिसमें मकान मालिक न रहता हो, आसपास सीसीटीवी कैमरे न लगे हों और लोग एक-दूसरे से ज्यादा मतलब न रखते हों। ऐसे मकान की तलाश में उन्होंने कई मोहल्ले और घर छाने। अंत में उन्हें रतनलाल नगर में ठिकाना मिला।
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kanpur kidnapping case
- फोटो : अमर उजाला
अपहरण की साजिश रचने वाले ईशू यादव ने पुलिस को बताया कि बर्रा, दबौली, गुजैनी, नौबस्ता में कई मकान देखने के बाद एक दलाल के माध्यम से रतनलाल नगर स्थित सुनील कुमार श्रीवास्तव के मकान के बारे में पता चला। चारों ने बिना मोलतोल किए 15 हजार रुपये देकर मकान ले लिया।
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वारदात के बाद पुलिस जब पूछताछ करने रतनलाल नगर स्थित घर के पास पहुंची तो आसपास के लोगों ने कुछ भी बताने से मना कर दिया। ठीक पड़ोस के मकान में दो सीसीटीवी कैमरे लगे थे, लेकिन उनकी दिशा दरवाजे की ओर ही थी। उसमें भी कुछ नहीं मिला। इसके अलावा आसपास कहीं भी कैमरे नहीं लगे मिले।
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- फोटो : amar ujala
कानपुर के बर्रा से 22 जून को लैब टेक्नीशियन संजीत यादव (28) का अपहरण फिरौती के लिए उसके दोस्त ने साथियों के साथ मिलकर किया था। 26 जून को उसकी हत्या कर लाश पांडु नदी में फेंक दी थी। इसके बाद पुलिस को चकमा देकर 13 जुलाई को 30 लाख की फिरौती भी वसूल ली थी। बृहस्पतिवार रात पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए दोस्त कुलदीप, रामबाबू समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
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पुलिस ने बताया कि कुलदीप संजीत के साथ सैंपल कलेक्शन का काम करता था। उसने रतनलाल नगर में किराये पर कमरा ले रखा था। 22 जून की रात शराब पिलाने के बहाने वह संजीत को अपने कमरे में लाया गया था। इसके बाद उसे बंधक बना लिया था। चार दिन तक बेहोशी के इंजेक्शन देकर उसे बंधक बनाकर रखा था। इसके बाद 26 जून को कुलदीप ने अपने दोस्त रामबाबू और तीन अन्य के साथ मिलकर संजीत की हत्या कर दी थी।