कानपुर में इन दिनों चिड़ियाघर विदेशी पक्षियों की चहचहाहट से चहक रहा है। भारतीय उपमहाद्वीप एवं दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में पाए जाने वाले पक्षियों ने चिड़ियाघर की झील किनारे डेरा डाल रखा है। नाइट हेरॉन, पॉन्ड हेरॉन, पेन्टेड स्टॉर्क, ओपेन बिल स्टार्क, कॉमन ग्रेहार्नबिल जैसे पक्षी अपनी खूबसूरती से लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
दरअसल, ये पक्षी जिन देशों से आते हैं, वहां ठंड अधिक होती है। ऐसे में यहां का मौसम उनके भोजन और प्रजनन के लिए मुफीद होता है। इसी वजह से हर साल नवंबर और दिसंबर में इनका आना शुरू हो जाता है। ठंड कम होते ही ये पक्षी अपने-अपने देशों के लिए उड़ जाते हैं। चिड़ियाघर के अधिकारियों की मानें तो ये पक्षी साइबेरिया, कंबोडिया, मंगोलिया, चाईना और यूरोपीय देशों से आते हैं। साइबेरियन पक्षियों की संख्या ज्यादा होती है।
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चिड़ियाघर में आए विदेशी पक्षी
- फोटो : अमर उजाला
अंधेरे में सक्रिय होता नाइट हेरॉन
सिलेटी और काले रंग का नाइट हेरॉन पक्षी बेहद खूबसूरत होता है। यह मछली और कीड़े खाता है। इसकी आंखें लाल व पंजे पीले रंग के होते हैं। नर व मादा एक जैसे दिखते हैं, लेकिन नर पक्षी आकार में बड़ा होता है।
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चिड़ियाघर में आए विदेशी पक्षी
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हिमालय से आया है पेन्टेड स्टॉर्क
गुलाबी छरहरी काया वाले पेन्टेड स्टॉर्क हिमालय से आकर झील किनारे खुशनुमा माहौल का लुत्फ ले रहे हैं। ये नवंबर में ही आ जाते हैं और बच्चों को जन्म देते हैं। सर्दी के बाद लौट जाते हैं। पेन्टेड स्टॉर्क शांत स्वभाव और एक ही मुद्रा में घंटों खड़े रहने के लिए जाने जाते हैं। इनके शरीर पर पेंट जैसी सुंदर आकृति होती है, इस वजह से इन्हें पेन्टेड स्टॉर्क कहा जाता है।
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चिड़ियाघर में आए विदेशी पक्षी
- फोटो : अमर उजाला
केरल के तटीय क्षेत्र से आई स्नेक बर्ड
मूलरूप से साउथ अमेरिका में हर मौसम में पाई जाने वाली स्नेक बर्ड केरल के तटीय क्षेत्रों से यहां आई है। सांप जैसी गर्दन होने की वजह से इस पक्षी को स्नेक बर्ड कहा जाता है। इसके अलावा ओपेन बिल स्टॉर्क, आइबिश जैसे पक्षी पहले ही कानपुर जू को अपना आशियाना बना चुके हैं।
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चिड़ियाघर में आए विदेशी पक्षी
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हैरान कर देगा ग्रे हेरान का शिकार करने का अंदाज
ग्रे हेरान पक्षी के शिकार करने का अंदाज बड़ा अलग होता है। यह पानी के अंदर जाकर मछली को बाहर लाता है। फिर उसे घायल कर खाता है। यह पक्षी यूरोप, अफ्रीका का मूल निवासी है। सर्दी शुरू होते ही यहां आ जाते हैं। फरवरी में लौट जाते हैं। इन्हें गर्मी जरा भी बर्दाश्त नहीं होती है।
सर्दी शुरू होते ही विदेशी पक्षियों का आना शुरू हो जाता है। अभी तक करीब एक दर्जन से अधिक पक्षियों ने झील किनारे आशियाना बना लिया है। इन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। - केके सिंह, चिड़ियाघर निदेशक