मुठभेड़ में पुलिस ने जिस नाबालिग प्रभात मिश्रा के सीने में मारी थी दो गोली उसके हाईस्कूल में आए थे इतने नंबर
प्रभात में से पढ़ाई में अव्वल था। हाईस्कूल में उसको ए-ग्रेडिंग मिली थी। हिंदी में 82 तो अंग्रेजी में 83 नंबर आए थे। परिवार वालों ने बताया कि प्रत्येक कक्षा में उसके इसी तरह से नंबर आए हैं। लोगों ने उसके व्यवहार की भी तारीफ की। जिसने भी वारदात में प्रभात के शामिल होने की सूचना सुनी वह दंग रह गया। प्रभात के ऊपर एक भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं था।
पुलिस के हाथों मारे गए प्रभात मिश्रा को बंदूक लेकर चलना बेहद पसंद था। वह फोर्स में जाना चाहता था, लेकिन विकास दुबे के घर आने जाने की कीमत उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़ी, यह कहना है प्रभात की मां गीता मिश्रा का। गीता ने बताया कि इकलौते बेटे की मौत से उनकी तो जिंदगी ही तबाह हो गई है। बिकरू कांड में 8 पुलिस कर्मियों की हत्या में प्रभात मिश्रा पुत्र राजेंद्र मिश्रा का नाम शामिल था। 7 जुलाई की सुबह पनकी थाना क्षेत्र के भौती के निकट पुलिस मुठभेड़ में प्रभात की मौत हुई थी।
घटना के बाद से पिता राजेन्द्र घर से फरार हैं, वहीं मां गीता व अन्य परिजन रो-रोकर बेहाल हैं। प्रभात की मां गीता के मुताबिक उनका बेटा बेकसूर था। केवल पड़ोसी होने का खामियाजा उसे भुगतना पड़ा है। उसने यूपी बोर्ड से इंटरमीडिएट की परीक्षा 66 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण की थी। फोर्स में जाने की बात कहता रहता था। बंदूक टांग कर चलना बहुत पसंद था। शौक पूरा करने के लिए कभी-कभी वह विकास दुबे के घर आया जाया करता था। उन्हें क्या मालूम था कि यह शौक एक दिन उसकी जान का दुश्मन बन जाएगा।