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बिकरू कांड: तीन थानों की पुलिस और जांच के लिए गठित एसआईटी पर भी संदेह, बड़ा सवाल किसे बचाया जा रहा.?
Sat, 18 Jul 2020 10:51 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 18 Jul 2020 10:51 AM IST
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kanpur encounter SIT
- फोटो : अमर उजाला
दहशतगर्द विकास दुबे के गुर्गों के फर्जी लाइसेंस शस्त्र बनने से तीन थानों की पुलिस-प्रशासन भी सवालों के घेरे में है। फर्जीवाड़े में गठित की गई एसआईटी की जांच भी संदेह के घेरे में आ गई है। सवाल है कि आखिर पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों को सत्यापित कैसे किया, प्रशासनिक प्रक्रिया में भी ये गड़बड़ी पकड़ी क्यों नहीं गई और एसआईटी अपनी जांच में इसको पकड़ क्यों नहीं पाई।
kanpur encounter
- फोटो : amar ujala
छोटी मछलियां फंस गई, बड़ी आजाद हैं। एसटीएफ के सूत्रों के मुताबिक विकास के गुर्गों ने कल्याणपुर, चौबेपुर के अलावा कानपुर देहात के शिवली थाना क्षेत्र से शस्त्र लाइसेंस बनवाए। लाइसेंस में लगाए गए दस्तावेज के अलावा नाम, पते भी फर्जी हैं। चूंकि शस्त्र लाइसेंस के आवेदन के बाद स्थानीय पुलिस इन्हीं दस्तावेजों, आवेदकों का पता, आपराधिक इतिहास का सत्यापन करती है।
kanpur encounter SIT
- फोटो : अमर उजाला
जो जांच में मिलता है, उस आधार पर रिपोर्ट लगाती है। प्रशासनिक प्रक्रिया भी होती है। अगर नाम पते के साथ दस्तावेज फर्जी थे तो पुलिस ने आवेदकों के पक्ष में रिपोर्ट कैसे लगाई। प्रशासनिक बैरियर पर इनको क्यों नहीं रोका गया। इस तरह से तीनों थानों की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। अब एसटीएफ इसकी परतें खोल रही है। सूत्रों के मुताबिक कई शस्त्र लाइसेंस धारकों पर केस भी दर्ज हैं।
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Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
क्या जमा नहीं कराए थे शस्त्र
फर्जी शस्त्र लाइसेंसों की जांच करने वाली एसआईटी का दावा था कि फर्जी बने 77 में से 55 शस्त्र लाइसेंस धारकों ने असलहा लिया था। अन्य ने तब तक असलहा नहीं खरीदा था। इन सभी को जमा करा लिया गया था। मगर एसटीएफ सूत्रों का कहना है कि आज भी विकास के गुर्गों के पास उन लाइसेंसों पर असलहे हैं। एसआईटी का तथ्य सही है या गलत अब आगे होने वाली जांचों में पता चलेगा।
फर्जी शस्त्र लाइसेंसों की जांच करने वाली एसआईटी का दावा था कि फर्जी बने 77 में से 55 शस्त्र लाइसेंस धारकों ने असलहा लिया था। अन्य ने तब तक असलहा नहीं खरीदा था। इन सभी को जमा करा लिया गया था। मगर एसटीएफ सूत्रों का कहना है कि आज भी विकास के गुर्गों के पास उन लाइसेंसों पर असलहे हैं। एसआईटी का तथ्य सही है या गलत अब आगे होने वाली जांचों में पता चलेगा।
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kanpur encounter
- फोटो : amar ujala
आज तक नहीं हुई कार्रवाई
शहर से बने 77 फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के मामले की जांच में खुलासा हुआ था कि सचेंडी थाने में विपिन सिंह नाम के अपराधी ने सौभाग्य सिंह नाम से शस्त्र लाइसेंस ले लिया था। इस मामले में थानेदार और चौकी इंचार्ज पर कार्रवाई हुई थी लेकिन आज तक अपराधी पर कार्रवाई नहीं हुई।
शहर से बने 77 फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के मामले की जांच में खुलासा हुआ था कि सचेंडी थाने में विपिन सिंह नाम के अपराधी ने सौभाग्य सिंह नाम से शस्त्र लाइसेंस ले लिया था। इस मामले में थानेदार और चौकी इंचार्ज पर कार्रवाई हुई थी लेकिन आज तक अपराधी पर कार्रवाई नहीं हुई।