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योगी सुनेंगे संतोष शुक्ला हत्याकांड की कहानी, सीएम खुफिया तंत्र और पुलिस से जुटा रहे हैं पूरी जानकारी
Sun, 05 Jul 2020 05:15 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 05 Jul 2020 05:15 PM IST
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पूर्व दर्जाप्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला (फाइल फोटो) सीएम योगी एवं कुख्यात अपराधी विकास
- फोटो : amar ujala
कानपुर के चौबेपुर में कुख्यात अपराधी विकास दुबे के साथ हुई मुठभेड़ में आठ जवानों के शहीद होने के बाद पुलिस और प्रशासन जागा है। अब पुलिस और प्रशासन ने विकास दुबे के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई करना शुरू कर दिया है। इस सब के बीच सीएम योगी संतोष शुक्ला हत्याकांड की कहानी सुनेंगे।
संतोष शुक्ला की हुई थी शिवली थाने में हत्या
- फोटो : amar ujala
2001 में तत्कालीन भाजपा सरकार में श्रम संविदा बोर्ड के चेयरमैन रहे दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला के शिवली थाने में घुसकर हत्या का मामला फिर तूल पकड़ सकता है। इस मामले में मुख्य आरोपी विकास दुबे कोर्ट से बरी हो चुका है लेकिन अब यह मामला मुख्यमंत्री की चौखट पर पहुंच गया है। इस मामले में मुख्यमंत्री पूरी जानकारी खुफिया तंत्र और पुलिस से जुटा रहे हैं।
विकास दुबे ने थाने में घुसकर मारी थीं छह गोलियां
- फोटो : amar ujala
विकास दुबे को इस मामले में प्रश्रय देने वाले नेताओं की सच्चाई जानने के लिए जल्द ही वह संतोष शुक्ला के भाई मनोज शुक्ला से भी बात करेंगे। पता चला है कि मनोज शुक्ला अपने भाई की हत्या के प्रकरण का सिलसिलेवार ब्योरा तैयार कर रहे हैं। बताया जाता है कि केस को लेकर जल्द वह मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे।
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मुठभेड़ में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं
- फोटो : amar ujala
मनोज ने मुख्यमंत्री की तरफ से कोई बात करने वाली जानकारी तो नहीं दी लेकिन गंभीरता से कहा कि विकास दुबे का तब तक बाल बांका नहीं हो सकता है, जब तक उसका संबंध बड़े नेताओं, बड़े अधिकारियों से खत्म नहीं हो जाता है। मनोज शुक्ला ने यह भी बताया कि विकास दुबे को संरक्षण देने वाले लोगों की एक लंबी लिस्ट है जो सरकार के बाहर और अंदर रहने वाले लोगों की है।
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सीएम योगी ने शहीद पुलिसकर्मियों को दिया गार्ड ऑफ ऑनर
- फोटो : amar ujala
यही वजह है कि 71 मुकदमे होने के बावजूद विकास दुबे का अभी तक बाल बांका नहीं हो पाया है। मनोज शुक्ला भी भाजपा से जुड़े हुए हैं। पिछली बार उन्होंने रनियां विधानसभा से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी की थी लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इस बार वह फिर रनियां सीट के लिए ही लगे हुए हैं। उनका कहना है कि इस बार भी वह पार्टी के सामने अपनी दावेदारी रखेंगे।