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कबरई बना कब्रगाह: पुलिस प्रशासन और सफेदपोशों के गठजोड़ से अवैध खनन के साथ मौत का कारोबार
Sun, 20 Sep 2020 10:27 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 20 Sep 2020 10:27 AM IST
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कब्रगाह बना कबरई
- फोटो : अमर उजाला
बुंदेलखंड का महोबा जिला मौजूदा समय में क्रशर कारोबारी की हत्या के बाद से एक बार फिर चर्चा में है। घटना कबरई जगह की है। ये इलाका खनन के लिए विख्यात है। यहां क्रशर(पत्थर काटने प्लांट) से घिरा हुआ है। पहाड़ियों पर हो रहे खनन और क्रशर ने कबरई को कब्रगाह में तबदील कर दिया है। हर तरफ धूल-धक्कड़। जर्जर सड़कें। यहां की पहचान बन गया है।
वायरल हो रहा है इंद्रकांत का फेसबुक पोस्ट
- फोटो : amar ujala
खनन माफिया ने अपनी दहशत और पैसों के जोर पर कबरई की ये दुर्दशा की है। खनन के दौरान आए दिन हादसे होते हैं। पिछले ढाई दशक में दो सौ से अधिक लोग मर चुके हैं। सैकड़ों लोग घायल हो चुके हैं। किसी ने हाथ गंवाया तो किसी ने आंख और पैर। उनको पैसे देकर उनकी जुबान बंद करवा दी जाती है। जिम्मेदार अफसर भी आंखें मूंदे रहते हैं। इसी तरह से वर्षों से यहां खनन, पैसे और मौत का खेल चल रहा है।
छावनी बना महोबा
- फोटो : amar ujala
पातालफोड़ खनन कर निकाल दिया पानी
बुंदेलखंड के पहाडों के खनन की सरकारी प्रक्रिया है। सरकार ही ई-टेंडर के जरिये पहाड़ों के पट्टे एलॉट करती है। एक बार जिसको पहाड़ का पट्टा मिल जाता है वो इस पत्थरों से सोना बनाने में लग जाता है। सारे नियम कानूनों को वो ताक पर रख देता है। कबरई के पचपहरा पहाड़ी की भी खनन माफिया ने दुर्गति की है। पहाड़ी इतनी खोदी की पानी निकल आया। जिसकी गहराई 200 से 300 फीट तक है। यानी पहाड़ मिलते गए और खनन होता रहा। खनन माफिया के सामने सरकारी तंत्र भी मूकबधिर बना रहा। पचपहरा पहाड़ी की तरह की आसपास की पहाड़ी का भी यही हाल है।
बुंदेलखंड के पहाडों के खनन की सरकारी प्रक्रिया है। सरकार ही ई-टेंडर के जरिये पहाड़ों के पट्टे एलॉट करती है। एक बार जिसको पहाड़ का पट्टा मिल जाता है वो इस पत्थरों से सोना बनाने में लग जाता है। सारे नियम कानूनों को वो ताक पर रख देता है। कबरई के पचपहरा पहाड़ी की भी खनन माफिया ने दुर्गति की है। पहाड़ी इतनी खोदी की पानी निकल आया। जिसकी गहराई 200 से 300 फीट तक है। यानी पहाड़ मिलते गए और खनन होता रहा। खनन माफिया के सामने सरकारी तंत्र भी मूकबधिर बना रहा। पचपहरा पहाड़ी की तरह की आसपास की पहाड़ी का भी यही हाल है।
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महोबा में पीएसी तैनात
- फोटो : amar ujala
मंदिर की जड़ें तक खोद डाली
कबरई में ही सिद्धबाबा पहाड़ी की दुर्गति भी खनन माफिया ने की है। जिन-जिन को इस पहाड़ी का पट्टा मिला उन्होंने जमकर अवैध खनन किया। यहां तक कि मंदिर की जड़ें तक खोद डाली। मंदिर इस तरह से बचा है कि मानो पहाड़ी पर अटका हुआ है। एक तरफ से पूरी तरह से पहाड़ गायब हो गए हैं। पास के पहाड़ में खनन जारी है। वहां विस्फोट आदि कराने से इस पहाड़ी के डैमेज होने का भी खतरा है।
कबरई में ही सिद्धबाबा पहाड़ी की दुर्गति भी खनन माफिया ने की है। जिन-जिन को इस पहाड़ी का पट्टा मिला उन्होंने जमकर अवैध खनन किया। यहां तक कि मंदिर की जड़ें तक खोद डाली। मंदिर इस तरह से बचा है कि मानो पहाड़ी पर अटका हुआ है। एक तरफ से पूरी तरह से पहाड़ गायब हो गए हैं। पास के पहाड़ में खनन जारी है। वहां विस्फोट आदि कराने से इस पहाड़ी के डैमेज होने का भी खतरा है।
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कारोबारी की मौत के बाद पत्नी और बच्चे बेहाल
- फोटो : अमर उजाला
क्रशर ने तबाह कर दी जिंदगी
आंकड़ों के मुताबिक कबरई की जनसंख्या 29 हजार 632 है। ये देश की एक बड़ी पत्थर मंडी है। जानकार बताते हैं। 1979 में कबरई में दो स्टोन क्रशर लगाए गए थे। उसके बाद से कबरई क्रशर से घिरने लगा था। सामाजिक कार्यकर्ता व युवा किसान पंकज सिंह परिहार बताते हैं कि वर्तमान में केवल कबरई में ही 350 क्रशर है। जिसमें दो सौ क्रशर चालू हैं। वहीं सरकारी लिखापढ़ी के मुताबिक चित्रकूट, बांदा और महोबा में कुल 308 क्रशर हैं। ये आंकड़ा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का है। साफ है कि जो अधिक क्रशर चल रहे हैं वो अवैध हैं। जिससे कबरई व अन्य खनन के इलाकों में तबाही हुई।
आंकड़ों के मुताबिक कबरई की जनसंख्या 29 हजार 632 है। ये देश की एक बड़ी पत्थर मंडी है। जानकार बताते हैं। 1979 में कबरई में दो स्टोन क्रशर लगाए गए थे। उसके बाद से कबरई क्रशर से घिरने लगा था। सामाजिक कार्यकर्ता व युवा किसान पंकज सिंह परिहार बताते हैं कि वर्तमान में केवल कबरई में ही 350 क्रशर है। जिसमें दो सौ क्रशर चालू हैं। वहीं सरकारी लिखापढ़ी के मुताबिक चित्रकूट, बांदा और महोबा में कुल 308 क्रशर हैं। ये आंकड़ा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का है। साफ है कि जो अधिक क्रशर चल रहे हैं वो अवैध हैं। जिससे कबरई व अन्य खनन के इलाकों में तबाही हुई।