तीन परिवार के छह सदस्य दस रूपये मेें एचआईवी की चपेट में अागए। अाप साेच रहे हाेंगे कि दस रूपये में भला काेई इस जानलेवा बीमारी का शिकार कैसे हाे सकता है पर सच यही है। जानिए क्या है इस लाइलाज बीमारी की पूरी कहानी।
उन्नाव में दस रुपये में इलाज करने वाले झोलाछाप ने कई मासूम जिंदगियों को लाइलाज बीमारी का शिकार बना दिया। हाल ही में बांगरमऊ में एचआईवी से पीड़ित मिले 38 लोगों की जब काउंसिलिंग की गई तो उनमें तीन ऐसे परिवार भी मिले जिनमें कहीं मां बेटे व कहीं पिता व बेटे को एचआईवी हो गया है।
चकमीरापुर में दो परिवारों में पिता पुत्र व एक परिवार में मां बेटे को एचआईवी से पीड़ित पाया गया है। पीड़ितों को इलाज के लिए एआरटी सेंटर कानपुर भेज दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने 24 जनवरी को बांगरमऊ के किरविदियापुर में कैंप लगाया था। यहां 84 लोगों ने जांच कराई।
जिनमें 3 लोग एचआईवी से पीड़ित पाए गए थे। इसी तरह प्रेमगंज में 286 लोग जांच के लिए पहुंचे। जिनमें 25 लोगों कों एचआईवी से पीड़ित पाया गया था। वहीं बांगरमऊ के चकमीरपुर में हुए कैंप में 196 ने जांच कराई थी। जिनमें 10 लोग एचआईवी की गिरफ्त में मिले थे।
तीन कैंपों में 38 लोगों में एचआईवी की पुष्टि के बाद सभी की हसनगंज के आईसीटीसी सेंटर में काउंसिलिंग के लिए बुलाया गया। एचआईवी की चपेट में आए बच्चे की उम्र महज सात साल है। बांगरमऊ में बाइक से घूम घूमकर लोगों का इलाज करने वाला झोलाछाप अभी पुलिस की पकड़ से दूर है।