हाेलिका दहन का शुभ मुहूर्त 1 मार्च को सायंकाल 06:26 मिनट से रात्रि 08:55 मिनट तक है। कुल अवधि 2:29 घंटे की प्राप्त हो रही है। पूर्णिमा भी 1 मार्च को प्रातः 08:57 मिनट से 2 मार्च को शाम 06:21 मिनट तक है। इस दाैरान तंत्र साधना की जाती है। महिलाअाें काे ध्यान देने की जरूरत है नहीं ताे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इस दौरान सफेद रंग की खाने पीने की चीजों के सेवन से बचना चाहिए। दरअसल इस शाम टोने-टोटके के लिए सफेद खाद्य पदार्थों का उपयोग किया जाता है। इसलिए इस दिन सफेद खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिये। किसी भी तरह के टोटके का प्रयोग सिर पर जल्दी होता है, इसलिए होलिका दहन वाले दिन सिर को ढककर रखने की सलाह दी जाती है।
टोने-टोटके को प्रभावशाली बनाने के लिए में व्यक्ति के कपड़ों का प्रयोग किया जाता है, इसलिए अपने कपड़ों का ध्यान रखें। इनका कोई भी टुकड़ा इधर उधर न फेंके और न ही इसे अपने से ईर्ष्या करने वालों के हाथ लगने दें। गर्भवती महिलाएं भी इस दिन खास सावधानी बरतें।
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हाेली पर गुलाल लगाती महिलाएं
गर्भस्थ शिशुओं और छोटे बच्चों पर तंत्र-मंत्र का असर जल्दी होता है। भूल से भी अनजानी वस्तुओं को न छुएं और ना ही घर में लेकर आएं। होली पर पूरे दिन अपनी जेब में काले कपड़े में बांधकर काले तिल रखें। रात को जलती होली में उन्हें डाल दें। माना जाता है कि इस तरह आप पर हुआ कोई भी टोटका खत्म हो जाएगा।