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हर्षिता की मौत बनी पहेली: मरने से पहले पिता ने बदल दिया था बयान, शपथपत्र देकर कही थी ये बात, 7वीं मंजिल से...

Tue, 10 Jan 2023 01:58 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 10 Jan 2023 01:58 PM IST
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Harshita husband released from jail for three and a half years, mother-in-law and father-in-law also acquitted
हर्षिता की मौत का मामला - फोटो : अमर उजाला
कानपुर के तिलकनगर स्थित एल्डोराडो अपार्टमेंट की सातवीं मंजिल से गिरकर साढ़े तीन साल पहले हुई हर्षिता अग्रवाल की मौत पहेली बनकर रह गई। लगभग तीन साल चली न्यायिक कार्यवाही के बाद अपर जिला जज 14 अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा ने दहेज हत्या के आरोपी पति, सास व ससुर को सबूत न होने के आधार पर दोषमुक्त करार दिया है। हर्षिता का विवाह 24 जनवरी 2017 को तिलकनगर निवासी उत्कर्ष अग्रवाल से हुआ था। 6 जुलाई 2019 को तिलकनगर स्थित एल्डोराडो अपार्टमेंट की सातवीं मंजिल से गिरकर उसकी मौत हो गई थी। हर्षिता के पिता पद्म कुमार अग्रवाल ने पति उत्कर्ष, सास रानू व ससुर सुशील के खिलाफ कोहना थाने में दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि सुशील अपनी बेटी की शादी के लिए 20 लाख रुपये देने का दबाव बना रहे थे, रुपये न देने पर हर्षिता को मौत के घाट उतार दिया। तीनों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजी गई थी। अभियोजन की ओर से 16 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। 
Harshita husband released from jail for three and a half years, mother-in-law and father-in-law also acquitted
हर्षिता की मौत का मामला - फोटो : अमर उजाला
बचाव पक्ष ने भी चार गवाह पेश किए। पिता ने पहले तो आरोपियों के खिलाफ गवाही दी लेकिन बाद में एक शपथपत्र देकर झूठा मुकदमा लिखाने की बात कह दी। इसी दौरान उनकी मौत भी हो गई थी। हर्षिता की बहन गीतिका, बहनोई रोहन व बहन के ससुर कमल कुमार गनेरीवाल ने कोर्ट में दिए बयान में कहा कि हर्षिता ने उन्हें कभी दहेज प्रताड़ना की बात नहीं बताई थी। हर्षिता की मौत में उसके पति, सास-ससुर की कोई भूमिका नहीं है। 

 
Harshita husband released from jail for three and a half years, mother-in-law and father-in-law also acquitted
हर्षिता की मौत का मामला - फोटो : अमर उजाला
अभियोजन अपनी बात को साबित नहीं कर सका और सबूतों व गवाहों के आधार पर कोर्ट ने उत्कर्ष, सुशील व रानू तीनों को बरी कर दिया। मुकदमे में सास-ससुर को तो जमानत मिल गई थी लेकिन उत्कर्ष साढ़े तीन साल से जेल में ही बंद था। कोर्ट का फैसला आने के बाद उत्कर्ष की जेल से रिहाई हो गई।
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Harshita husband released from jail for three and a half years, mother-in-law and father-in-law also acquitted
हर्षिता की मौत का मामला - फोटो : अमर उजाला
मरने से पहले पिता ने बदला था बयान
पद्म ने कोर्ट में अपने बयान दर्ज करा दिए थे लेकिन बाद में एक शपथपत्र देकर मुकर गए थे। इसमें कहा था कि बेटी ने आवेश और उत्तेजना में आकर आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया। घटना के समय उत्कर्ष व सुशील ससुराल में मौजूद नहीं थे। कैंसर की बीमारी के दौरान उन्होंने महसूस किया कि उत्कर्ष, रानू व सुशील हर्षिता की मौत के लिए दोषी नहीं हैं इसलिए मुकदमे की पैरवी बंद कर दी। दहेज मांगने का जो आरोप लगाया है वह क्रोध व आवेश में आकर लगा दिया, दहेज के लिए कभी हर्षिता का उत्पीड़न नहीं किया गया। मेरा स्वास्थ्य ऐसा नहीं है कि मैं न्यायालय में आकर बयान दे सकूं इसलिए बिना किसी दबाव में अपना शपथपत्र तैयार कराकर न्यायालय में पेश कर रहा हूं ताकि न्यायालय को सही तथ्यों की जानकारी हो सके। शपथपत्र दाखिल होने के कुछ ही दिनों बाद ही पद्म की मौत हो गई थी।
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Harshita husband released from jail for three and a half years, mother-in-law and father-in-law also acquitted
हर्षिता की मौत का मामला - फोटो : अमर उजाला
अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं। फैसले का अध्ययन किया जा रहा है। कई ऐसे बिंदु सामने आ रहे हैं जिससे अभियोजन संतुष्ट नहीं है। फैसले के खिलाफ अभियोजन अपील की तैयारी कर रहा है, जल्द ही हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।- दिलीप अवस्थी, डीजीसी क्रिमिनल
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