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महोबा: 30 फीट गहरे बोरवेल में गिरा मासूम, एनडीआरएफ-एसडीआरएफ ने 22 घंटे चलाया रेस्क्यू फिर भी नहीं बची जान

Thu, 03 Dec 2020 09:50 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 03 Dec 2020 09:50 AM IST
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Four-year-old child falls into deep borewell in mahoba
बोरवेल में गिरा बच्चा, जान बचाने की कवायद जारी - फोटो : अमर उजाला
22 घंटे तक चले रेस्क्यू के बाद भी एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मासूम की जान नहीं बचा सकीं। गुरुवार सुबह 8 बजकर 44 मिनट पर बोरवेल से घनेंद्र को बाहर निकाला गया। जिसके बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 


चार साल का मासूम घनेंद्र अपने ही खेत में खुले पड़े बोरवेल में गिर गया था। पुलिस और प्रशासनिक अफसरों ने मौके पर पहुंचकर राहत व बचाव का काम शुरू कराया था। इस दौरान खेत में मौजूद मासूम के पिता भागीरथ कुशवाहा, मां क्रांति देवी, दोनों बहनें नित्या व रेखा के अलावा दादी आशारानी, बाबा कालीचरन दोपहर से देररात तक मौके पर डटे रहे थे।

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीम मौके पर पहुंची। टीम ने टनल बनाने का काम शुरू कर दिया है। गांव के लोग और रिश्तेदार इन लोगों को ढांढस बंधाते रहे कि भगवान पर विश्वास रखें, घनेंद्र सकुशल बोरवेल से निकल आएगा, पर जैसे-जैसे रात होने लगी, वैसे-वैसे ही परिवार को अनहोनी की आशंका भी सताने लगी।

इसके बाद घनेंद्र की मां, दादी, बड़ी बहन नित्या खेत में ही उसके सकुशल बोरवेल निकलने के लिए हाथ जोड़कर बैठ गईं। सभी भगवान से घनेंद्र की जान की रक्षा के लिए प्रार्थना करती रहीं।
Four-year-old child falls into deep borewell in mahoba
बोरवेल में गिरा बच्चा, जान बचाने की कवायद जारी - फोटो : अमर उजाला
गांव की कई महिलाओं ने भी ईश्वर से घनेंद्र के लिए प्रार्थना की। उधर, घनेंद्र के बोरवेल में गिरने की खबर मिलते ही डॉ. पीके सिंह और डॉ. राजेश वर्मा की अगुवाई में एक टीम पहुंची। इस दौरान दो एंबुलेंस को भी मौके पर तैनात कर दिया गया। डॉक्टरों की टीमें दो आक्सीजन सिलिंडर साथ लेकर पहुंची थी।

इन्हीं सिलिंडरों से पाइप को जोड़ कर बोरवेल में गिरे बच्चे तक आक्सीजन पहुंचाई गई। सिलिंडर खाली होने पर दो और आक्सीजन सिलिंडर वहां मंगाए गए। दो एंबुलेंस इसलिए मंगाई गई कि बच्चे को बोरवेल से निकालने के बाद जल्द अस्पताल पहुंचाया जा सके।

साथ ही घनेंद्र के परिवार के किसी सदस्य की तबीयत बिगड़ती है, तो उसे एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया जा सके। वहीं मौके पर एसएफओ देवेश तिवारी की अगुवाई में फायर कर्मियों की आठ सदस्यीय टीम भी पहुंची। फायर कर्मियों ने पुलिस की मदद से बोरवेल के पास मौजूद लोगों को दूर किया और बोरवेल की गहराई देखी।
Four-year-old child falls into deep borewell in mahoba
बोरवेल में गिरा बच्चा, जान बचाने की कवायद जारी - फोटो : अमर उजाला
डॉक्टरों की मदद कर आक्सीजन पाइप को बोरवेल के अंदर गिरे बच्चे तक पहुंचाने का काम किया। इसके बाद खुदाई के दौरान कई बार फायर कर्मी खोदे जा रहे गड्ढे की नापजोख कर अफसरों को बताते रहे कि कितना गहरा गड्ढा खुद चुका है और कितना और खुदना है।

एसडीएम और चौकी प्रभारी की सराहना
ग्रामीणों ने कुलपहाड़ के एसडीएम मोहम्मद उवैस और बेलाताल चौकी प्रभारी सुनील तिवारी की तारीफ की। बताया कि दोपहर करीब डेढ़ बजे बेलाताल चौकी प्रभारी और एसडीएम मौके पर पहुंच गए। एसडीएम ने बड़े अफसरों को सूचना देेने के साथ ही जेसीबी और डॉक्टरों की टीम को बुलाया।

जेसीबी और डॉक्टरों की टीम के पहुंचते ही घनेंद्र की जान बचाने के लिए काम शुरू कराया। अंत तक चौकी प्रभारी और एसडीएम डटे रहे। इसके अलावा कुलपहाड़, अजनर, श्रीनगर, पनवाड़ी समेत कई थानों की फोर्स भी मौके पर पहुंची।
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बोरवेल में गिरा बच्चा, जान बचाने की कवायद जारी - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन ने बोरवेल के आसपास लाइटें लगवाई
प्रशासन के लाइटिंग की व्यवस्था करने के बाद घनेंद्र को बचाने का काम और तेजी से शुरू हुआ, पर अंधेरा होने तक बोरवेल से बाहर नहीं निकाला जा सका। अंधेरा होता देख अफसरों ने एक बड़े जनरेटर की व्यवस्था की। इसके बाद बोरवेल के आसपास और नौ ट्यूब लाइटें और छह हाइलोजन लाइटें लगाकर रोशनी की गई। इसके बाद राहत कार्य में किसी तरह की रुकावट नहीं आई।

छह जेसीबी और आठ ट्रैक्टर भी लगे
जैसे-जैसे रात हो रही थी वैसे-वैसे घनेंद्र की जान बचाने का काम तेजी पकड़ रहा था। दोपहर में दो जेसीबी गड्ढा खोदने के लिए मंगाई गईं। शाम पांच बजे दो और जेसीबी मंगाई गई। शाम सात बजे फिर एक जेसीबी मंगाई गई। शाम 7.27 बजे छठवीं जेसीबी वहां पहुंची और बोरवेल के पास गड्ढा खोदने का काम शुरू हुआ।

भीड़ रोकने के लिए पुलिस ने बांधा रस्सा
घनेंद्र के बोरवेल में गिरने की खबर पाकर बुधौरा समेत आसपास के गांवों के सैकड़ों लोग मौके पर जुट गए। राहत व बचाव कार्य में दिक्कत होने पर पुलिसकर्मियों ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को बोरवेल से करीब 25 मीटर दूर किया। इसके बाद वहां रस्सा बांध कर भीड़ को बोरवेल के पास आने से रोका गया।
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बोरवेल में गिरा बच्चा, जान बचाने की कवायद जारी - फोटो : अमर उजाला
पिता ने सिंचाई के लिए खुदवाया था गड्ढा
किसान भागीरथ कुशवाहा ने खेत में सिंचाई के लिए इसी जुलाई माह में बोरवेल का गड्ढा खुदवाया था, लेकिन पानी नहीं निकला। किसान ने गड्ढा बंद नहीं कराया था। उसे एक पत्थर से ढक दिया था। अफसर जांच कर रहे कि बच्चों के खेलने के बाद गड्ढे के ऊपर से पत्थर हटा था अथवा पहले से हटा हुआ था।

मां पहुंची खेत, दंपति हुए बेहोश
बच्चे के बोरवेल में गिरने की सूचना पर मां क्रांति देवी महोबा से गांव के लिए चल पड़ी। करीब दो घंटे के बाद खेत में पहुंचकर बच्चे को पुकारते हुए गड्ढे के पास बैठ गई। पत्नी की हालत देखकर भगीरथ भी खुद को नहीं रोक सके। वह भी दहाड़ मार कर रो पड़े। इस दौरान दोनों बेहोश हो गए। रिश्तेदारों के संभालने पर फिर रोने लगे। रिश्तेदार दोनों को ढांढस बंधाने में लगे रहे। दोनों बहनें रेखा और नित्या के भी आंसू नहीं रुक रहे थे।
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