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यहां दिखा ‘दुख-दर्द का गहरा समंदर’, हर आंख से गिरता रहा ‘आंसुओं का झरना’
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 23 May 2017 08:53 AM IST
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एक साथ उठीं चार लाशें देख हर आंख में आंसू
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13 साल की मासूम मान्या को क्या पता था कि 15 घंटे पहले फोन पर हुई बातचीत उसकी अपने मां-बाप, दादी और भाई से ‘जिंदगी की आखिरी बातचीत’ हो जाएगी। सब कुछ तो अच्छा ही चल रहा था कि अचानक एक झटके में सब राख होकर खत्म हो गया। गर्मियों की छुट्टियां मनाने मान्या अपने भाई उज्जवल के साथ नानी के घर गई हुई थी। मौत उज्जवल को मम्मी-पापा तक खींचकर घर ले गई।
चाचा-चाची और दादी के अंतिम दर्शन करने जाता नीरज का भतीजा
कानपुर चकेरी के लालबंगला नई सब्जी मंडी में सोमवार दोपहर दो बजे नीरज, उसकी पत्नी शिल्पी, मां मेम रानी और बेटे उज्जवल का शव पोस्टमार्टम पहुंचा। यहां तीन घंटे तक अंतिम दर्शन का सिलसिला चला। महिलाओं की वेदना देख आसपास मौजूद लोग अपने आंसू नहीं रोक सके।
रोते बिलखते मृतकों के परिजन
जैसे ही सिद्धनाथ घाट में अंतिम संस्कार को ले जाने के लिए एक साथ चारों की अर्थी उठी। य नजारा देख मानो हर किसी का कलेजा फट गया । आंसुओं के सैलाब और दर्द के समंदर में डूबे पड़ोसी, रिश्तेदार, दोस्त यहां तक कि पुलिस और मीडियावालों की आंख में भी आंसू आ गये।
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रोते बिलखते मृतकों के परिजन
इस घटना के बाद लालबंगला बाजार की सभी दुकानें बंद कर दी गईं। रिश्तेदार, परिजन को ढांढस बंधाते रहे। इनकी अंतिम यात्रा में कानपुर के बड़े कारोबारी, नेता और वकील शामिल दिखे। सिद्धनाथ घाट पर नीरज, शिल्पी, मेमरानी और उज्जवल का एक साथ अंतिम संस्कार हुआ।
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रो-रोकर बेहोश तक हो गईं मृतक नीरज की ये रिश्तेदार महिलाएं
सिद्धनाथ धाट में हुआ एक साथ तीन पीढ़ियों का अंतिम संस्कार देख हर कोई बेहद दुखी नजर आ रहा था। एक साथ मां-पिता भाई और दादी के शव देख परिवार में बची मान्या स्तब्ध थी।