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भाजपा सरकार के करीबी बाबा मणींद्र की मुसीबतें बढ़ाएगी फिंगर प्रिंट रिपोर्ट, शिष्य की हत्या में नामजद
Mon, 30 Dec 2019 09:53 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमर उजाला, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, अमर उजाला, जालौन
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 30 Dec 2019 09:53 PM IST
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पुलिस गिरफ्त में विजय शंकर उर्फ मणींद्र महाराज
- फोटो : अमर उजाला
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मणींद्र महाराज के नीनावली आश्रम में शिष्य की हत्या के मामले में बाबा और उनके घरवाले भले ही मामले को आत्महत्या बता रहे हों पर रिवाल्वर की फिंगर प्रिंट रिपोर्ट बाबा की मुसीबतें बढ़ा सकती है। पुलिस का कहना है कि मामला आत्महत्या का नहीं है, क्योंकि यदि सुसाइड होता तो रिवाल्वर जमीन पर गिरा पड़ा होता, पुलिस को रिवाल्वर दरोगा के पास मिला है।
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी बाबा मणींद्र महाराज
- फोटो : अमर उजाला
करीब एक माह के भीतर फिंगर प्रिंट रिपोर्ट भी आ जाएगी, जिससे साफ हो जाएगा कि गोली बाबा के हाथ से चली या फिर दरोगा के हाथ से। वहीं अपर पुलिस अधीक्षक डॉ अवधेश सिंह का कहना है कि कई और जांच रिपोर्ट आना बाकी है, जिससे पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी। बता दें कि 26 दिसंबर को निनावली के आश्रम में बाबा मणींद्र महाराज के शिष्य गांव निवासी युवक रविशंकर की हत्या हो गई थी।
बाबा मणींद्र महाराज के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
- फोटो : अमर उजाला
इस मामले में पुलिस ने भी पहले बाबा को हत्या के मामले में और फिर दरोगा को साजिश रचने में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। बाबा और उसके घरवाले अभी भी यही कह रहे हैं कि युवक की हत्या नहीं हुई बल्कि उसने आत्महत्या की है। जबकि पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि दरोगा राजेंद्र तिवारी का सर्विस रिवाल्वर वारदात के वक्त जमीन पर गिरा ही नहीं है, यदि गिरा होता तो वह पुलिस को मौके पर पड़ा मिला होता।
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भाजपा नेता महेंद्रनाथ पांडेय को आर्शीवाद देता बाबा मणींद्र महाराज
- फोटो : अमर उजाला
इतना ही पुलिस ने जब घटनास्थल पर दरोगा से उनका सर्विस रिवाल्वर लिया तो उसमें कहीं कोई मिट्टी या कुछ भी ऐसा निशान नहीं मिला था, जिससे लगे कि वह जमीन पर गिरा होगा, जबकि आत्महत्या के मामले में रिवाल्वर का जमीन पर गिरना तय था। पुलिस को अब रिवाल्वर की फिंगर प्रिंट रिपोर्ट आने का इंतजार है, जिससे साफ हो जाएगा कि गोली किसके हाथ से चली।
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मृतक के पिता एवं आरोपी मणिंद्र महाराज
- फोटो : अमर उजाला
एसओजी टीम ने बाबा की पत्नी व बच्चों से भी बयान लिए, जिसमें सभी के बातें अलग अलग आ रही है, सबसे बड़ी तेरह साल की बेटी का कहना है कि वह तो पीछे झाड़ू लगा रही थी, तभी गोली की आवाज हुई पर उसने ध्यान नहीं दिया। पत्नी का कहना है कि वह बच्चों के साथ टीवी देख रही थी, इस कारण उसे गोली की आवाज सुनाई नहीं दी। बच्चों और पत्नी दोनों के बयान में एक समानता जरूर है कि वे छह माह पहले तक लखनऊ के गोमती नगर में रहते थे।