मैं अपने साथी कर्मचारियों प्रदीप, नरेंद्र, जयप्रकाश फैक्टरी में मिक्सर मशीन में माल तैयार कर रहे थे। थके होने की वजह से इस बीच उन तीनों आंख लग गई। कुछ पल में वे गहरी नींद में सो गए। तभी अचानक मोटर जाम होने से शार्ट सर्किट से आग लग गई।
फैक्टरी में चौतरफा प्लॉस्टिक दाने, थिनर और केमिकल होने के चलते आग और भड़क गई। इसके चलते पूरी फैक्टरी में आग की लपटें और धुआं फैल गया। धुआं और आग फैलते देख फैक्टरी के प्रथम तल पर मौजूद कर्मचारी पड़ोस की छत के रास्ते भाग खड़े हुए।
इस घबराहट में मैं भी कुछ समझ नही पाया। जल्दबाजी में ग्राउंड फ्लोर पर सो रहे तीनों को जगा नहीं सके। इससे आग और धुएं में घिर जाने की वजह से उनका दम घुट गया और उन तीनों की मौत हो गई। फजलगंज स्थित फैक्टरी में लगी आग में दहशत के पलों को शैलेंद्र वर्मा ने कुछ ऐसे बयां किया।
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कानपुर अग्निकांड
- फोटो : अमर उजाला
जानकारी के अनुसार, अग्निकांड में जान गवांने वाले तीन मजदूर हादसे के वक्त मशीन के पास सो रहे थे। जिसके चलते उन्हें शार्ट सर्किट का पता नहीं चल सका। दरअसल रात में जाड़े की वजह से भी उन तीनों को आग की गर्माहट का अंदाजा ही नहीं लग पाया। देखते ही देखते धुआं पूरे फ्लोर में फैल गया।
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इसी जहरीले धुएं की चपेट में आने से तीनों की जान चली गई। फजलगंज के गड़रियनपुरवा स्थित साइकिल की गद्दी बनाने वाली एसके इंडस्ट्रीज में शुक्रवार तड़के साढ़े तीन बजे शॉर्ट सर्किट से आग लगने का अंदाजा वहां काम करने वाला कोई कर्मचारी नहीं लगा सका।
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बताया जा रहा है कि इससे पहले भी इसी तरह मजदूर काम करते-करते नींद के आगोश में पहले भी चुके हैं, लेकिन शुक्रवार की तड़के उनके जीवन की आखिरी रात साबित हुई। इसी फैक्टरी में काम करने वाले शैलेंद्र की आंखे अपने साथियों के मौत के मंजर को बताते हुए डबडबा जाती हैं।
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उसने बताया कि पूरी फैक्टरी में इस कदर धुआं भर गया कि उसमें सांस ले पाना किसी के लिए मुमकिन नहीं था। यहीं वजह है कि जो बाकी लोग जाग रहे थे, उनका वहां पर रहकर सांस लेना मुश्किल हो गया, जिससे अपनी जान बचाने के लिए वे भागने को मजबूर हो गए।