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जन्म लेते ही मनुष्य पर चढ़ जाते हैं कर्ज, जानिए मुक्ति पाने के लिए क्यों ली जाती है इस पक्षी की मदद

Sat, 14 Sep 2019 10:22 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sat, 14 Sep 2019 10:22 PM IST
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Feeding Crows for the Shradh
सोलह दिन कौवा हर घर की छत का मेहमान बनता है - फोटो : अमर उजाला
हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है। मान्यता है कि पितृपक्ष में पितर धरती पर आकर लोगों को आशीर्वाद देते हैं। ये पितर पशु-पक्षियों के रूप में हमारे आसपास आते हैं। श्राद्ध तर्पण के बाद कुछ पशुओं और पक्षियों को भोजन कराने की परंपरा है। सूरज निकलते ही घर की मुंडेर पर बैठे कौवों की 'काँव-काँव' शुरू हो जाती हैं, जो सूरज ढलने तक जारी रहती हैं।


 
Feeding Crows for the Shradh
पशुओं और पक्षियों को भोजन कराने की परंपरा है - फोटो : अमर उजाला
शाम को कौए अपने बसेरे की तरफ उड़ जाते हैं। विष्णु पुराण में श्राद्धपक्ष में भक्ति और विनम्रता से यथाशक्ति भोजन कराने की बात कही गई है। कौए को पितरों का प्रतीक मानकर श्राद्ध पक्ष के सोलह दिनों तक भोजन कराया जाता है। भादौ महीने के सोलह दिन कौवा हर घर की छत का मेहमान बनता है।

 
Feeding Crows for the Shradh
हिंदू धर्म में पक्षियों को भोजन कराने की परंपरा है - फोटो : अमर उजाला
ये सोलह दिन श्राद्ध पक्ष के दिन माने जाते हैं। कौवा एवं पीपल को पितृ प्रतीक माना जाता है। इन दिनों कौए को खाना एवं पीपल को पानी पिलाकर पितरों को तृप्त किया जाता है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि गाय, कुत्ता, कौवा और चींटी को पितृपक्ष में भोजन कराना चाहिए। इन्हीं पशु पक्षियों के रूप में हमारे पितर आसपास मौजूद रहते हैं।

 
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Feeding Crows for the Shradh
हिंदू धर्म में गाय को भोजन कराने की परंपरा है - फोटो : अमर उजाला
श्राद्ध के समय इनके लिए भी आहार का एक अंश निकाला जाता है, तभी श्राद्ध कर्म पूर्ण होता है। श्राद्ध करते समय पितरों को अर्पित करने वाले भोजन के पांच अंश निकाले जाते हैं। गाय, कुत्ता, चींटी, कौवा और देवताओं के लिए। इन पांच अंशों का अर्पण करने को पञ्च बलि कहा जाता है।

 
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Feeding Crows for the Shradh
पितरों को श्राद्ध देने के लिए जुटे लोग। - फोटो : chandauli
कुत्ता जल तत्व का प्रतीक है ,चींटी अग्नि तत्व का, कौवा वायु तत्व का, गाय पृथ्वी तत्व का और देवता आकाश तत्व का प्रतीक हैं। इस प्रकार इन पांचों को आहार देकर हम पंच तत्वों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। केवल गाय में ही एक साथ पांच तत्व पाए जाते हैं। इसलिए पितृ पक्ष में गाय की सेवा विशेष फलदाई होती है। मात्र गाय को चारा खिलाने और सेवा करने से पितरों को तृप्ति मिलती है साथ ही श्राद्ध कर्म सम्पूर्ण होता है।
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