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15 घंटे बाद नदी से निकले दरोगा-सिपाही के शव, लाशें देख चीख पड़े परिजन, पुलिस लाइन में दी गई सलामी

Mon, 27 Apr 2020 09:10 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उलाजा, फतेहपुर
न्यूज डेस्क, अमर उलाजा, फतेहपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Mon, 27 Apr 2020 09:10 AM IST
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fatehpur : After 15 hours, the dead body of the daroga and sipahi was removed from the river
15 घंटे बाद नदी से निकले दरोगा-सिपाही के शव - फोटो : अमर उजाला
फतेहपुर के किशनपुर थाना क्षेत्र के यमुना घाट पर नाव पलटने में डूबे दरोगा, कांस्टेबल व नाविक के शव करीब पंद्रह घंटे बाद रविवार की सुबह नौ बजे के आसपास निकाले जा सके। सभी के शव बारी-बारी से जाल में फंसते चले गए। रेस्क्यू अभियान में एनडीआरएफ, पीएसी व गोताखोरों की मदद ली गई। दोपहर दो बजे शवों का पोस्टमार्टम हुआ। पुलिस लाइन में सलामी और श्रद्धांजलि देने के बाद शव परिजनों को सुपुर्द किए गए। पुलिस ने ड्यूटी के दौरान इत्तफाकिया हादसे में मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज की है।


 
fatehpur : After 15 hours, the dead body of the daroga and sipahi was removed from the river
लाॅकडाउन में गश्त के दौरान पलट गई थी नाव - फोटो : अमर उजाला
किशनपुर थाने के इंचार्ज रामजीत (47), सिपाही शशिकांत (25) और सिपाही निर्मल यादव नाविक रवी को लेकर ड्यूटी पर शनिवार की दोपहर 12 बजे रवाना हुए थे। तभी बांदा से लॉकडाउन तोड़कर कुछ लोगों के नाव से इस पार आने की सूचना मिली थी। सभी लोग बांद सीमा से लौट रहे थे। करीब शाम छह बजे आंधी, तूफान में नाव पलटने में दरोगा रामजीत, शशिकांत और रवी डूब गए थे।

 
fatehpur : After 15 hours, the dead body of the daroga and sipahi was removed from the river
स्थानीय गोताखोरों की मदद से घंटों सर्च अभियान चला - फोटो : अमर उजाला
स्थानीय गोताखोरों की मदद से घंटों सर्च अभियान चला। देर रात 12 वाहिनीं पीएसी पहुंची थी। वाराणसी से एनडीआरएफ टीम बुुलाई गई। बीएसएफ कंपनी के रोहित भरद्वाज, मिथलेश टीम के साथ पहुंचे। सुबह चार बजे एनडीआरएफ के साथ मोटरबोट से रेस्क्यू चालू किया। एसपी प्रशांत वर्मा भी मौके पर मौजूद रहे। सुबह बांदा के जोरावर गांव के गोताखोर भी पहुंचे। बड़ा जाल डाला गया। करीब साढ़े आठ बजे नाव के पलटने वाली जगह से साठ मीटर दूरी पर जाल में शव फंसा। कुछ मिनट बाद दरोगा का शव भी जाल में फंसा। इसी जाल में सिपाही शशिकांत का शव फंसा।

 
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fatehpur : After 15 hours, the dead body of the daroga and sipahi was removed from the river
परिजन शवों को देखकर दहाड़ मारकर रोने लगे - फोटो : अमर उजाला
परिजन शवों को देखकर दहाड़ मारकर रोने बिलखने लगे। दरोगा रामजीत मूल रूप से जौनपुर मछली शहर के रहने वाले थे। पांच साल पहले प्रयागराज के बगाड़ा में मकान बनवाया था। सिपाही शशिकांत गाजीपुर जिले के कसिमाबाद खजरुहां निवासी थे। नाविक रवि बिहार के पटना मरसगामी थाने के दीदारगंजटोला का रहने वाला था। पुलिस लाइन में एसपी प्रशांत वर्मा, एएसपी राजेश कुमार, सहायक पुलिस अधीक्षक चक्रेश मिश्रा व सभी सीओ, शहर कोतवाल की मौजूदगी में शवों को सलामी दी गई। एसपी ने परिवार के लोगों को मदद का आश्वासन दिया।

 
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fatehpur : After 15 hours, the dead body of the daroga and sipahi was removed from the river
फतेहपुर में दर्दनाक हादसा, पुलिस कर्मियों पास नहीं थे शस्त्र, अलग मिले जूते - फोटो : अमर उजाला
पुलिस कर्मियों पास नहीं थे शस्त्र, अलग मिले जूते
पुलिस सूत्रों के मुताबिक पुलिस कर्मी ड्यूटी पर बगैर असलहों के रवाना हुए थे। टीम के पास कोई असलहा नहीं था। थानाध्यक्ष आरके यादव ने बताया कि पुलिस कर्मी ड्यूटी पर लाठी डंडे लेकर निकले थे। पुलिस कर्मी जूते पहने हुए थे। डूबने की घटना में माना जाता है कि जूते पहने होने से तैरना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने जान बचाने की कोशिश में जूते उतारे होगे।
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