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Farrukhabad Hostage Case: रात 12.30 बजे आक्रोशित हुई भीड़, हथौड़ा व ईंटें मार तोड़ा दरवाजा
Fri, 31 Jan 2020 12:36 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 31 Jan 2020 12:36 PM IST
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फर्रुखाबाद: रात को भड़की भीड़ तो सुरक्षित निकल पाए बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
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फर्रुखाबाद के मोहम्मदाबाद कोतवाली के करथिया गांव में बंधक बनाए गए बच्चों को मुक्त कराने में पुलिस को 12 घंटे लग गए। रात करीब 12.30 बजे भीड़ जब आक्रोशित हुई तो सैकड़ों की संख्या में लोगों ने सुभाष के घर का दरवाजा ईंटों व हथौड़ों से तोड़ा जिसके बाद पुलिस अंदर जा सकी।
फर्रुखाबाद: अपहरणकर्ता सुभाष बाथम
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस के घर के अंदर घुसते ही सुभाष ने फायरिंग शुरू कर दी। इसमेें दो पुलिस कर्मी घायल हो गए। जवाबी कार्रवाई में सुभाष की मौत हो गई। इस दौरान सुभाष की पत्नी घायल हो गई। पुलिस ने पत्नी व बच्चे को कब्जे में लिया। पत्नी को सीएचसी भेजा और पुत्री को एक ग्रामीण के हवाले कर दिया। बंधनमुक्त कराए गए बच्चों का स्वास्थ्य टीम देर रात तक चिकित्सीय परीक्षण करती रही।
सभी बच्चे सुरक्षित छुड़ाए गए
- फोटो : अमर उजाला
करथिया निवासी सुभाष बाथम ने पुत्री के जन्मदिन के बहाने गुरुवार दोपहर गांव के 23 बच्चों को घर बुलाकर बंधक बना लिया था। चार बजे से पुलिस ने बच्चों को मुक्त कराने के लिए उसके घर की घेराबंदी की थी। डीएम, एसपी पुलिस बल के साथ आरोपी के घर के बाहर डटे रहे। कानपुर जोन आईजी मोहित अग्रवाल भी घटना स्थल पर देर रात पहुंचे। उन्होंने पूरे मामले का जायजा लिया और बच्चों को मुक्त कराने का प्रयास शुरू किया। लेकिन सफल नहीं हुए।
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फर्रुखाबाद: सिरफिरे ने 11 घंटों से 23 बच्चों को बना कर रखा बंधक
- फोटो : अमर उजाला
सुभाष के दोस्तों ने अपनी बातों से बहलाकर देर रात छह माह की शबनम को मुक्त करा लिया। इसके बाद अन्य बच्चों के मुक्त न होने पर उनके परिवार वाले और गांव के लोग रात करीब 12.30 बजे आक्रोशित हो उठे। उन्होंने सुभाष के घर के दरवाजे पर ईंटों व पत्थरों से हमला कर दिया। गुस्साए गांव के लोगों ने हथौड़ा व ईंटें मारकर दरवाजा तोड़ दिया। इससे पुलिस कर्मी घर के अंदर घुस गए।
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सुरक्षित बचाए बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
सुभाष ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। इसमें दो पुलिस कर्मी घायल हो गए और जवाबी कार्रवाई में सुभाष मारा गया। फायरिंग बंद होने के बाद गुस्साए गांव के लोग भी घर में घुस गए और पथराव कर दिया और सुभाष की पत्नी को पकड़ कर पीट दिया। इससे वह घायल हो गई। पुलिस ने सुभाष की पत्नी को ग्रामीणों से छुड़ाया और सीएचसी भेज दिया। उसकी पुत्री गौरी को एक ग्रामीण के सुपुर्द कर दिया।