कहावत है कि विद्या दान देने से बढ़ती है और इसी पर अमल करते हुए कुठौंद क्षेत्र गिगौरा गांव निवासी युवा आनंद प्रजापति स्वयं तो सिविल सर्विस की तैयार कर ही रहे हैं, साथ साथ वे अपने गांव और आसपास के अन्य गांव के बच्चों को भी शिक्षित कर रहे हैं। इसके बदले प्रत्येक बच्चे से प्रति माह सिर्फ एक रुपये शुल्क लेते हैं।
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सिर्फ एक रुपये में बच्चों को पढ़ा रहे आनंद
- फोटो : अमर उजाला
यह शुल्क भी ब्लैक बोर्ड, आवश्यक स्टेशनरी के खर्च के लिए जाते हैं। इतना ही नहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीएससी पास आनंद कुछ युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मदद करते हैं। आनंद ने बताया कि फिलहाल उनके घर पर ही इस वक्त कक्षा एक से 12 वीं तक के करीब 50 बच्चे पढ़ने आते हैं।
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सिर्फ एक रुपये में बच्चों को पढ़ा रहे आनंद
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लॉकडाउन के चलते बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए उन्होंने करीब साल भर पहले उन्हें पढ़ाने का काम शुरू किया था, वह आज भी चल रहा है। बच्चों के प्रत्येक सप्ताह टेस्ट भी लिए जाते हैं। बीच-बीच में क्षेत्र के बीडीओ संदीप यादव इन मेधावी बच्चों को पुरस्कृत कर उनका हौसला बढ़ाते हैं।
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सिर्फ एक रुपये में बच्चों को पढ़ा रहे आनंद
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पढ़ाई के साथ साथ वे कुछ समय निकालकर बच्चों को खेलकूद के लिए भी प्रेरित करते हैं। इसके अलावा कुछ युवा प्रतियोगी परीक्षा के लिए भी मदद लेने आते हैं। इनमें विनय कुमार ने हाल ही में रेलवे की परीक्षा दी है। उन्होंने एक संस्था भी बना रखी है, जिसका नाम पढ़ो, पढ़ाओ, जीवन बढ़ाओ रखा गया है।
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छात्रा पूजा
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खत्म हुई बोलने की झिझक
कक्षा सात की छात्रा पूजा का कहना है कि पहले बच्चों के सामने बोलने में झिझकती थी, जबसे संस्था में पढ़ने आने लगी, तबसे ज्ञान बढ़ा तो अब बोलने में झिझक भी खत्म हुई है।