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इस धनतेरस भगवान धनवंतरी के आशीर्वाद से हो जाइये मालामाल, जानिए शुभ मुहूर्त से लेकर सब कुछ
सलोनी भल्ला, कानपुर
Updated Thu, 01 Nov 2018 03:34 PM IST
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भारत त्यौहारों का देश है। यहां हर त्यौहार को बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। हम में से बहुत से लोग त्यौहार मनाते तो जरूर हैं लेकिन इनको मानाने के पीछे की वजह नहीं जानते। दीपावली के दिन काफी करीब हैं लेकिन दीपावली की शुरुआत होती है धनतेरस से। धनतेरस कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी यानी दीपावली से दो दिन पहले आता है। इस दिन लोग अपने घर के दरवाजे के पास दीया जलाते हैं और नया बर्तन या चांदी खरीदते हैं।
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जानिए क्यों मनाया जाता है धनतेरस
शास्त्रों के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन समुद्र मंथन के दौरान चिकित्सा विज्ञान के देवता भगवान धनवंतरी प्रकट हुए थे। धनत्रयोदशी के दिन भगवान धनवंतरी का जन्म हुआ था और इसीलिए इस दिन को धनतेरस के रूप में पूजा जाता है।
शास्त्रों के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन समुद्र मंथन के दौरान चिकित्सा विज्ञान के देवता भगवान धनवंतरी प्रकट हुए थे। धनत्रयोदशी के दिन भगवान धनवंतरी का जन्म हुआ था और इसीलिए इस दिन को धनतेरस के रूप में पूजा जाता है।
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दीपावली के दो दिन पहले आने वाले इस त्यौहार को लोग काफी धूमधाम से मनाते हैं । इस दिन गहनों और बर्तनों की खरीदारी जरूर की जाती है ।
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शुभ होता है पीतल और चांदी के बर्तन खरीदना
भगवान धनवंतरी को नारायण भगवान विष्णु का ही एक रूप माना जाता है। इनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें से दो भुजाओं में वे शंख और चक्र धारण किए हुए हैं। दूसरी दो भुजाओं में औषधि के साथ वे अमृत कलश लिए हुए हैं।
भगवान धनवंतरी को नारायण भगवान विष्णु का ही एक रूप माना जाता है। इनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें से दो भुजाओं में वे शंख और चक्र धारण किए हुए हैं। दूसरी दो भुजाओं में औषधि के साथ वे अमृत कलश लिए हुए हैं।
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ऐसा माना जाता है कि यह अमृत कलश पीतल का बना हुआ है क्योंकि पीतल भगवान धनवंतरी की प्रिय धातु है इसलिए इस दिन पीतल का बर्तन या चांदी खरीदना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई कोई भी वस्तु शुभ फल प्रदान करती है और लंबे समय तक चलती है लेकिन अगर भगवान की प्रिय वस्तु पीतल की खरीदारी की जाए तो इसका तेरह गुना अधिक लाभ मिलता है।