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कुलदीप सेंगर प्रकरण: फोरेंसिक जांच खोलेगी यूनुस की मौत का राज, गांव में पसरा सन्नाटा, घर पर मातम
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 27 Aug 2018 08:41 AM IST
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शनिवार रात मृतक के घर के बाहर मौजूद पुलिस बल
- फोटो : अमर उजाला
उन्नावः विधायक कुलदीप सेंगर प्रकरण में सीबीआई के गवाह यूनुस की मौत पर उठे सवालों और पांच दिनों से मचे घमासान के पटाक्षेप में पुलिस और प्रशासन लगातार 18 घंटे तक पसीना-पसीना रहा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यूनुस की मौत की वजह सामने नहीं आई है। डाक्टरों ने विसरा सुरक्षित किया है। विसरा की फोरेंसिक लैब में जांच होगी।
मौजूद कोतवाल अरुण द्विवेदी
- फोटो : अमर उजाला
तीन जार में सुरक्षित किया गया विसरा, डीएनए सैंपल भी सील
एक जार में लंग्स (फेफड़ा), ह्रदय और ब्रेन का कुछ हिस्सा। दूसरे जार में लीवर और गाल ब्लेडर व दोनों किडनी के कुछ हिस्से। तीसरे जार में छोटी आंत का पीस सुरक्षित किया गया है। इसके अलावा पांच जार में कब्र की मिट्टी, डाक्टरों के मुताबिक मिट्टी के नमूने की भी जांच कराई जाएगी। डॉक्टरों का मानना है कि कब्र में शव दफनाने के कुछ दिन बाद यदि प्वाइजन है तो मिट्टी में आ जाता है। इसलिए मिट्टी को भी सुरक्षित कर जांच को भेजा गया है।
तीन प्रार्थनापत्र मिलने से जरूरी हुआ पोस्टमार्टम
एसपी हरीश कुमार ने बताया कि यूनुस का पोस्टमार्टम कराना इसलिए जरूरी हो गया था कि किशोरी के चाचा की ओर से एक प्रार्थना पत्र दिया गया जिसमें यूनुस की मौत में साजिश की आशंका जताई गई। इसके बाद सफीपुर सीओ विवेक रंजन राय की जांच में मृतक यूनुस के भाई जान मोहम्मद की ओर से दिया गया एक प्रार्थना पत्र मिला जिसमें यूनुस की मौत को लेकर आशंका जताई गई इसके बाद मृतक यूनुस की पत्नी शबीहा खातून की ओर से एक प्रार्थनापत्र दिया गया जिसमें पति की बीमारी से मौत होने की बात बताई गई।
तीन अलग-अलग तरह के प्रार्थनापत्र आने से शव का पोस्टमार्टम कराना जरूरी हो गया था। शनिवार को कब्र से शव निकलवाने की कार्रवाई शुरू की गई तो परिवार के लोगों ने विरोध किया। इसी दौरान बीमारी का बहाना बनाकर परिवार के लोग लखनऊ सीएम आवास पहुंच गए और वहां आत्मदाह का प्रयास किया।
एक जार में लंग्स (फेफड़ा), ह्रदय और ब्रेन का कुछ हिस्सा। दूसरे जार में लीवर और गाल ब्लेडर व दोनों किडनी के कुछ हिस्से। तीसरे जार में छोटी आंत का पीस सुरक्षित किया गया है। इसके अलावा पांच जार में कब्र की मिट्टी, डाक्टरों के मुताबिक मिट्टी के नमूने की भी जांच कराई जाएगी। डॉक्टरों का मानना है कि कब्र में शव दफनाने के कुछ दिन बाद यदि प्वाइजन है तो मिट्टी में आ जाता है। इसलिए मिट्टी को भी सुरक्षित कर जांच को भेजा गया है।
तीन प्रार्थनापत्र मिलने से जरूरी हुआ पोस्टमार्टम
एसपी हरीश कुमार ने बताया कि यूनुस का पोस्टमार्टम कराना इसलिए जरूरी हो गया था कि किशोरी के चाचा की ओर से एक प्रार्थना पत्र दिया गया जिसमें यूनुस की मौत में साजिश की आशंका जताई गई। इसके बाद सफीपुर सीओ विवेक रंजन राय की जांच में मृतक यूनुस के भाई जान मोहम्मद की ओर से दिया गया एक प्रार्थना पत्र मिला जिसमें यूनुस की मौत को लेकर आशंका जताई गई इसके बाद मृतक यूनुस की पत्नी शबीहा खातून की ओर से एक प्रार्थनापत्र दिया गया जिसमें पति की बीमारी से मौत होने की बात बताई गई।
तीन अलग-अलग तरह के प्रार्थनापत्र आने से शव का पोस्टमार्टम कराना जरूरी हो गया था। शनिवार को कब्र से शव निकलवाने की कार्रवाई शुरू की गई तो परिवार के लोगों ने विरोध किया। इसी दौरान बीमारी का बहाना बनाकर परिवार के लोग लखनऊ सीएम आवास पहुंच गए और वहां आत्मदाह का प्रयास किया।
मृतक यूनुस के घर के बाहर गमगीन बैठे परिजन व रिश्तेदार
- फोटो : अमर उजाला
लखनऊ के हजरतगंज सीओ देर रात परिवार के लोगों को वापस उन्नाव लाए। शहर काजी और अल्पसंख्यक नेता सहित अन्य लोगों की मदद ली और शव का पोस्टमार्टम कराया गया। शव के दोबारा अंतिम संस्कार के समय पूरा परिवार मौजूद रहा।
विधायक कुलदीप सिंह सेंगर प्रकरण में सीबीआई के गवाह यूूनुस की संदिग्ध हालात में मौत के आरोप से एक बार फिर मामला सुर्खियों में है। शनिवार सुबह से रात तक मृतक युनूस के घर जिला प्रशासन व पुलिस का जमावड़ा रहा। देर रात शव का पोस्टमार्टम कर शव कब्र में दफना दिया गया है। रविवार मृतक के घर रिश्तेदारों व परिजनों की आवाजाही बनी रही। हर कोई मौत का सच जानने को आतुर दिखा। पत्नी व परिजनों की जुबां पर बस एक ही जवाब कि हमें कुछ नहीं पता, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चलेगा।
गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। कोई भी व्यक्ति इस मुद्दे पर चर्चा तो दूर, किसी तरह की प्रतिक्रिया तक से भी दूरी बनाए है। घरों की बंद चहारदीवारी में घटनाक्रम जरूर चर्चा का केंद्र बना है। मृतक के घर मातम के बीच सिसकियां गूंज रही हैं।
विधायक कुलदीप सिंह सेंगर प्रकरण में सीबीआई के गवाह यूूनुस की संदिग्ध हालात में मौत के आरोप से एक बार फिर मामला सुर्खियों में है। शनिवार सुबह से रात तक मृतक युनूस के घर जिला प्रशासन व पुलिस का जमावड़ा रहा। देर रात शव का पोस्टमार्टम कर शव कब्र में दफना दिया गया है। रविवार मृतक के घर रिश्तेदारों व परिजनों की आवाजाही बनी रही। हर कोई मौत का सच जानने को आतुर दिखा। पत्नी व परिजनों की जुबां पर बस एक ही जवाब कि हमें कुछ नहीं पता, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चलेगा।
गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। कोई भी व्यक्ति इस मुद्दे पर चर्चा तो दूर, किसी तरह की प्रतिक्रिया तक से भी दूरी बनाए है। घरों की बंद चहारदीवारी में घटनाक्रम जरूर चर्चा का केंद्र बना है। मृतक के घर मातम के बीच सिसकियां गूंज रही हैं।
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मृतक के मोहल्ले में पसरा सन्नाटा
- फोटो : अमर उजाला
विधायक कुलदीप सिंह प्रकरण में कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की सक्रियता लगातार बनी हुई है। बीते चार माह में विधायक प्रकरण में वह चार बार ट्वीट कर चुके हैं। हर ट्वीट में वह भाजपा सरकार को सवालों के घेरे में खड़ा करते हैं। हाल ही में सीबीआई के गवाह की मौत के बाद राहुल गांधी के ट्वीट ने इस मामले को दोबारा राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया था। जिसके बाद सक्रिय हुई पुलिस ने शव को कब्र से बाहर निकलवाकर उसका पोस्टमार्टम कराया।
विधायक कुलदीप सिंह प्रकरण में राहुल गांधी ने सबसे पहले 9 अप्रैल को ट्वीट कर भाजपा सरकार को घेरा था। पहले ट्वीट में उन्होंने भाजपा विधायक पर बलात्कार का आरोप होने के बाद भी किशोरी के पिता को हिरासत में लेने और हिरासत में ही उसकी मौत हो जाने पर सवाल उठाया था। इस ट्वीट के दो दिन बाद उन्होंने किशोरी के पिता के साथ हुई मारपीट की घटना के संबंध में फिर ट्वीट किया था।
इस बार राहुल गांधी ने वह वीडियो भी शेयर किया था जिसमें किशोरी का पिता अस्पताल में मेडिकल परीक्षण के दौरान अपनी चोटें दिखा रहा था। इस ट्वीट के दो दिन बाद राहुल गांधी ने उन्नाव प्रकरण में एक और ट्वीट कर देश में बेटियों व महिलाओं पर बढ़ रहे अत्याचार व आरोपियों को गिरफ्तार करने में हो रही देरी पर सीधे प्रधानमंत्री से सवाल किया था। राहुल गांधी के ट्वीट के कुछ घंटे बाद ही विधायक की गिरफ्तारी हो गई थी। जिसके जवाब में उन्होंने एक और ट्वीट कर प्रधानमंत्री को चुप्पी तोड़ने और बेटियों को न्याय मिलने की संभावना पर धन्यवाद कहा था।
विधायक कुलदीप सिंह प्रकरण में राहुल गांधी ने सबसे पहले 9 अप्रैल को ट्वीट कर भाजपा सरकार को घेरा था। पहले ट्वीट में उन्होंने भाजपा विधायक पर बलात्कार का आरोप होने के बाद भी किशोरी के पिता को हिरासत में लेने और हिरासत में ही उसकी मौत हो जाने पर सवाल उठाया था। इस ट्वीट के दो दिन बाद उन्होंने किशोरी के पिता के साथ हुई मारपीट की घटना के संबंध में फिर ट्वीट किया था।
इस बार राहुल गांधी ने वह वीडियो भी शेयर किया था जिसमें किशोरी का पिता अस्पताल में मेडिकल परीक्षण के दौरान अपनी चोटें दिखा रहा था। इस ट्वीट के दो दिन बाद राहुल गांधी ने उन्नाव प्रकरण में एक और ट्वीट कर देश में बेटियों व महिलाओं पर बढ़ रहे अत्याचार व आरोपियों को गिरफ्तार करने में हो रही देरी पर सीधे प्रधानमंत्री से सवाल किया था। राहुल गांधी के ट्वीट के कुछ घंटे बाद ही विधायक की गिरफ्तारी हो गई थी। जिसके जवाब में उन्होंने एक और ट्वीट कर प्रधानमंत्री को चुप्पी तोड़ने और बेटियों को न्याय मिलने की संभावना पर धन्यवाद कहा था।
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शनिवार रात मृतक के घर के बाहर मौजूद पुलिस बल
- फोटो : अमर उजाला
राहुल गांधी के लगातार ट्वीट के बाद उन्नाव प्रकरण राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय मीडिया में भी छाया रहा। वहीं एक सप्ताह पूर्व विधायक प्रकरण में गवाह यूनुस की मौत के बाद राहुल गांधी ने फिर मामले को सुर्खियों में ला दिया। उन्होंने गवाह की मौत के पीछे साजिश की आशंका जताते हुए तीन दिन पहले ट्वीट किया। राहुल गांधी के ट्वीट के बाद ही प्रशासन ने सक्रियता दिखाई थी और यूनुस के शव का पोस्टमार्टम कराने का निर्णय लिया।
कर्मचारियों में मारपीट से 15 मिनट बाधित हुआ था पोस्टमार्टम
यूनुस के शव के पोस्टमार्टम के दौरान स्वीपर और कर्मचारियों में नशे की हालत में मारपीट हो गई। इस दौरान करीब 15 मिनट तक पोस्टमार्टम प्रक्रिया रुकी रही। कोतवाली प्रभारी अरुण द्विवेदी ने दोनों पक्षों को समझाकर शांत कराया।
कर्मचारियों में मारपीट से 15 मिनट बाधित हुआ था पोस्टमार्टम
यूनुस के शव के पोस्टमार्टम के दौरान स्वीपर और कर्मचारियों में नशे की हालत में मारपीट हो गई। इस दौरान करीब 15 मिनट तक पोस्टमार्टम प्रक्रिया रुकी रही। कोतवाली प्रभारी अरुण द्विवेदी ने दोनों पक्षों को समझाकर शांत कराया।