बांदा जिले में साथ जीने मरने की कसम खाकर घर से भागे प्रेमी युगल के शव जंगल में पेड़ पर एक ही रस्सी से लटके मिले। प्रेमी युगल किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे। मृतक के पिता गुलाब राजपूत किसान हैं। उनके पास चार बीघा खेती है। मृतका ऊषा के पिता अयोध्या राजपूत के पास तीन बीघा खेती है। वह भी किसानी करते हैं।
'साथ जीना-मरना है': मोहब्बत में आड़े आ रहा था परिवार, पहले दोनों ने डाई पी...फिर फंदे से झूले, पढ़ें पूरा मामला
लकड़ी बांधने के नाम पर खरीदी थी रस्सी
ग्रामीणों ने बताया कि विकास ने मंगलवार को दोपहर बड़ैछा गांव में एक दुकानदार के यहां से लकड़ी बांधने के नाम पर रस्सी भी खरीदी थी। उधर, देर शाम जब दोनों के परिजन घर आए, तो वह घरों से नदारद थे। परिजन ने चुपचाप दोनों की खोजबीन भी की, लेकिन वह नहीं मिले।
डाई घुली हुई मिली बोतल
बुधवार को दोपहर एक बजे के करीब चरवाहों ने जंगल में उनके शव लटके देखे तो परिजनों और पुलिस को खबर दी। नरैनी इंस्पेक्टर अरविंद सिंह गौर घटना स्थल पहुंचे। उन्होंने बताया कि घटनास्थल में बालों में लगाने वाली डाई की तीन पुड़िया, आधा लीटर की दो पेप्सी की बोतल में से एक बोतल में डाई घुली हुई मिली है।
प्रेम प्रसंग के खिलाफ थे परिजन
एक बोतल में पानी भरा मिला। मृतकों के मोबाइल फोन भी मिले हैं। इनकी कॉल डिटेल निकाली जा रही है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। एक बिरादरी, फिर भी थे शादी के खिलाफ थे परिजन पारिवारिक सूत्रों और ग्रामीणों के हवाले से बताया गया है कि परिजनों को इनके प्रेम प्रसंग की जानकारी थी।
फिर दोनों ने उठा लिया आत्मघाती कदम
एक बिरादरी के होने के बावजूद दोनों के परिजन शादी के लिए राजी नहीं थे। शायद इसलिए उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठा लिया। मृतक विकास दो भाई एक बहन में बड़ा था। बहन की शादी शुदा है। पिता गुलाब राजपूत गांव में खेती किसानी के साथ-साथ मुंबई में रहकर कमाते हैं। उधर, मृतक ऊषा आठ बहनों में पांचवें नंबर की थी।