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पुष्पक एक्सप्रेस पलटाने की साजिश के पीछे कहीं आतंकी हाथ तो नहीं, दिल्ली तक गूंजा मामला
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 28 Aug 2018 10:22 AM IST
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रेल अफसरों में मचा हड़कंप, दिल्ली तक गूंजा मामला
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लखनऊ-कानपुर रेल मार्ग पर पुष्पक एक्सप्रेस को पलटाने की साजिश का मामला दिल्ली तक पहुंच गया। इंजन में ट्रैक पर पड़ी बाइक फंसने की घटना के बाद महकमे के अफसरों में हड़कंप मच गया। उधर, ट्रेन को पलटाने की साजिश की चर्चा और रेल मंत्रालय के ट्विटर अकाउंट पर ट्विट होने से दिल्ली तक मामले की गूंज पहुंच गई। दिल्ली के बड़े अधिकारी भी पल-पल की अपडेट लेने में जुट गए। रेल अधिकारी ट्रेन पलटाने की साजिश को फिलहाल निराधार बता रहे हैं। सीओ सिटी ने बताया कि रेल ट्रैक पर मिली बाइक दो माह पहले चोरी हुई थी। उन्होंने बाइक चोर तक पहुंचने और उससे पूछताछ कर मंशा जानने की बात कही है। उधर आतंकी साजिश की बात भी सामने आ रही है।
दिल्ली के अधिकारी लेते रहे पल-पल की अपडेट
रेलवे पुलिस ने ट्रेन की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हुई बिना नंबर की बाइक को कब्जे में लिया और घटनास्थल सिविल क्षेत्र का होने के चलते गंगाघाट पुलिस को सौंप दी। रेलवे सुरक्षा बल व सिविल पुलिस ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की। सीओ सिटी स्वतंत्र सिंह भी पहुंचे और बाइक की चेसिस नंबर के आधार पर सोमवार को एआरटीओ से वाहन स्वामी का नाम पता लगाया गया। जानकारी मिली कि बाइक गंगाघाट के कृष्णानगर निवासी ब्रह्मशंकर की है। पुलिस ने वाहन स्वामी से पूछताछ की तो बताया कि उसकी बाइक 26 जून को चोरी हुई थी। इसकी रिपोर्ट गंगाघाट थाने में 29 जून को दर्ज कराई गई थी। दोनों टीमों ने गंगाघाट व आजाद नगर के आपराधिक इतिहास वाले शातिरों की गिरफ्तारी के प्रयास में दबिश देना शुरू कर दिया है।
रेल अफसरों में मचा हड़कंप, दिल्ली तक गूंजा मामला
गंगा ब्रिज से छमक नाली का रेलमार्ग नहीं है सुरक्षित
बीते तीन साल में गंगाब्रिज कानपुर छोर से छमक नाली के बीच वैशाली एक्सप्रेस, साबरमती एक्सप्रेस व हरौनी-पिपरसंड के बीच बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में लूटपाट की बड़ी वारदातें हो चुकी हैं। वहीं अक्सर ऋषिनगर केबिन से छमक नाली के बीच कई बार सिग्नल केबल को भी अराजकतत्व नुकसान पहुंचा चुके हैं। रविवार की घटना के बाद जीआरपी व आरपीएफ ने एहतियातन रेल सुरक्षा के विशेष बंदोबस्त की कवायद शुरू कर दी है।
बीते तीन साल में गंगाब्रिज कानपुर छोर से छमक नाली के बीच वैशाली एक्सप्रेस, साबरमती एक्सप्रेस व हरौनी-पिपरसंड के बीच बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में लूटपाट की बड़ी वारदातें हो चुकी हैं। वहीं अक्सर ऋषिनगर केबिन से छमक नाली के बीच कई बार सिग्नल केबल को भी अराजकतत्व नुकसान पहुंचा चुके हैं। रविवार की घटना के बाद जीआरपी व आरपीएफ ने एहतियातन रेल सुरक्षा के विशेष बंदोबस्त की कवायद शुरू कर दी है।
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इसी बाइक को ट्रैक के बीच रखा गया था
रेल मंत्रालय के अफसर तक एलर्ट
रेल पटरी पर बाइक मिलने की सूचना से रेल मंत्रालय के अफसर तक अलर्ट हो गए। मामला दिल्ली तक पहुंचने से एसपी रेलवे सौमित्र यादव समेत अन्य कई स्थानीय अधिकारी निगाहें गड़ाए हैं। इसके अलावा एलआईयू व आईबी समेत अन्य खुफिया एजेंसियां अलर्ट हो गई और अपने स्तर पर जांच में जुट गईं है। रेल अधिकारी भले ही ट्रेन पलटाने की साजिश को अफवाह बता रहे हैं, लेकिन जांच में हर बिंदु को शामिल कर गहन पड़ताल में जुटे हैं।
रेल पटरी पर बाइक मिलने की सूचना से रेल मंत्रालय के अफसर तक अलर्ट हो गए। मामला दिल्ली तक पहुंचने से एसपी रेलवे सौमित्र यादव समेत अन्य कई स्थानीय अधिकारी निगाहें गड़ाए हैं। इसके अलावा एलआईयू व आईबी समेत अन्य खुफिया एजेंसियां अलर्ट हो गई और अपने स्तर पर जांच में जुट गईं है। रेल अधिकारी भले ही ट्रेन पलटाने की साजिश को अफवाह बता रहे हैं, लेकिन जांच में हर बिंदु को शामिल कर गहन पड़ताल में जुटे हैं।
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पुष्पक एक्सप्रेस को पलटाने की सूचना पर जांच करते पुलिस के अधिकारी।
आम्रपाली एक्सप्रेस को क्षति पहुंचाने की चल रही जांच
22 मार्च 2018 की रात गंगाघाट रेलवे स्टेशन (कानपुर बायां पुल) ऋषिनगर केबिन समीप डाउन रेलमार्ग पर रेल पटरियों के बीच रेलवे के चार-चार फिट गाडर डालकर आम्रपाली एक्सप्रेस को क्षति पहुंचाने की साजिश की गई थी। इस दौरान रेल इंजन से टकराकर गाडर पटरी से हट गए थे। वहीं लोको पायलट ने सूझबूझ का परिचय देते हुए इमरजेंसी ब्रेक लेकर ट्रेन को रोकने में सफल रहा था। ट्रेन को पलटाने की साजिश की आशंका पर एलआईयू, आईबी के अलावा एटीएस (एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाएड) ने भी जांच की। कागजों पर जांच अभी भी जारी है। पांच माह बीतने के बाद भी विभाग जांच को अंतिम रूप नहीं दे सका है।
22 मार्च 2018 की रात गंगाघाट रेलवे स्टेशन (कानपुर बायां पुल) ऋषिनगर केबिन समीप डाउन रेलमार्ग पर रेल पटरियों के बीच रेलवे के चार-चार फिट गाडर डालकर आम्रपाली एक्सप्रेस को क्षति पहुंचाने की साजिश की गई थी। इस दौरान रेल इंजन से टकराकर गाडर पटरी से हट गए थे। वहीं लोको पायलट ने सूझबूझ का परिचय देते हुए इमरजेंसी ब्रेक लेकर ट्रेन को रोकने में सफल रहा था। ट्रेन को पलटाने की साजिश की आशंका पर एलआईयू, आईबी के अलावा एटीएस (एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाएड) ने भी जांच की। कागजों पर जांच अभी भी जारी है। पांच माह बीतने के बाद भी विभाग जांच को अंतिम रूप नहीं दे सका है।