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ये कैसा मंजर: अस्पतालों में न बेड हैं न शव जलाने के लिए जगह, मौत की चीख और आंसुओं के बीच हालात भयावह

Wed, 21 Apr 2021 05:29 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Wed, 21 Apr 2021 05:29 PM IST
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coronavirus: No beds in hospitals, no place to burn bodies
घाटों पर नहीं बची अंतिम संस्कार की जगह तो गंगा किनारे पहुंचे लोग - फोटो : amar ujala
कानपुर में कोरोना संक्रमित तीन गंभीर मरीजों को अस्पतालों में बेड न मिलने से जान चली गई। परिवारीजन इसके लिए कोविड कमांड सेंटर और सीएमओ दफ्तर के चक्कर लगाते रहे। घंटों इधर से उधर भटकते एक को अस्पताल में बेड मिला तब तक देर हो चुकी थीं। दूसरे ने घर पहुंचकर दम तोड़ दिया। तीसरे को भर्ती होने का लेटर मिल चुका था लेकिन अस्पताल वाले इंतजार कराते रहे और जान चली गई। कोरोना मरीजों को इलाज न मिल पाने के कारण लगातार मौतें हो रही हैं।
coronavirus: No beds in hospitals, no place to burn bodies
नहीं है अंतिम संस्कार करने के लिए जगह - फोटो : amar ujala
नौबस्ता गोपाल नगर में भी ऐसा ही मामला सामने आया। चार दिन पहले पिता की कोरोना से मौत के बाद सोमवार की रात को बेटे की भी इलाज के अभाव में मौत हो गई। बहू प्राइवेट कोविड अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही है। मंत्री सतीश महाना से फोन करवाने के बाद 12 घंटे बाद एंबुलेंस शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जा सकी। इसके बाद पहुंची पुलिस ने घर को सील कर दिया। संक्रमण की लहर ने कुछ ही दिनों में हंसते खेलते पूरे घर को तहस नहस कर दिया। नौबस्ता गोपाल नगर निवासी गोपाल कृष्ण दीक्षित 80 रेलवे से रिटायर्ड थे।

 
coronavirus: No beds in hospitals, no place to burn bodies
विद्युत शव दाह ग्रह के पार्क में हुआ अंतिम संस्कार - फोटो : amar ujala
घर पर बेटा उतम दीक्षित 45, बहू पिंकी 40, दो पोते राघवेंद्र 24 व रत्नेश 21 के साथ हंसी खुशी जीवन यापन कर रहे थे। चार दिनों पूर्व कृष्ण दीक्षित को बुखार और सांस लेने में दिक्कत हुई। उन्हें भर्ती कराने का प्रयास किया गया लेकिन बेड नहीं मिला। घर आकर उनकी मौत हो गई। इसके बाद उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद उत्तम दीक्षित और पिंकी की भी तबीयत बिगड़ने लगी। उनकी भी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद पिंकी को तो बेटों ने किसी तरह जुगाड़ कर प्राइवेट कोविड अस्पताल में भर्ती करा दिया, लेकिन उत्तम को किसी अस्पताल में बेड नहीं मिल सका।

 
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coronavirus: No beds in hospitals, no place to burn bodies
घाट पर अंतिम संस्कार के लिए लंबी लाइनें - फोटो : amar ujala
बेटों ने उनके लिए घर पर ही ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था की। इसके बाद सोमवार की रात उनकी मौत हो गई। आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि दुखी परिवार रात भर हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर मदद मांगता रहा, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। मंत्री सतीश महाना के हस्तक्षेप के बाद हैलट से एक एंबुलेंस 12 घंटे बाद उनके घर पहुंची और शव को लेकर गई। अस्पताल में भर्ती पिंकी की भी हालत गंभीर है। वहीं, छोटे बेटे रत्नेश का भी स्वास्थ्य ठीक नहीं है। बड़े बेटे राघवेंद्र के अनुसार कोरोना से घर में दो मौतों के बाद भी प्रशासन ने अभी तक उनकी जांच नहीं कराई है।
 
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coronavirus: No beds in hospitals, no place to burn bodies
कोरोना से मचा कोहराम - फोटो : amar ujala
वहीं कल्याणपुर निवासी बीपी त्रिपाठी को कोविड अस्पताल में बेड नहीं मिला। बीपी त्रिपाठी (51) को चार दिन से बुखार आ रहा था। कोरोना जैसे लक्षण थे, पर आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव आई थी। हालांकि सीटी स्कैन में फेफड़ों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। परिजन उन्हें किसी भी कोविड हॉस्पिटल में भर्ती कराने के लिए कोविड कमांड सेंटर और सीएमओ दफ्तर के चक्कर लगाते रहे, लेकिन दोनों जगह से उन्हें टरकाया जाता रहा। इस बीच मजबूरन उन्हें न्यू शिवली रोड कल्याणपुर स्थित कान्हा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां रात 11:30 बजे बीपी त्रिपाठी की मौत हो गई।

 
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