कोरोना के इस दौर में रोज मानवता को झकझोर देने वाले मामले सामने आ रहे हैं। कल्याणपुर के राजकीय उन्नयन बस्ती में रहने वाले विजय कुमार ने अपने बीमार जवान बेटे सौरभ को वेंटिलेटर दिलाने के लिए हर संभव कोशिश की।
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कोरोना से मचा कोहराम
- फोटो : amar ujala
हाथ जोड़े, विनती की लेकिन जब उनके बेटे को वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उनके सामने ही बेटे ने दम तोड़ दिया। सौरभ की कोरोना जांच तो निगेविट थी, लेकिन लक्षण कोरोना वाले ही थे। सौरभ (27) की तीन दिन पहले बुखार आया था।
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खुले में जले शव
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तबीयत बिगड़ी तो पास के एक अस्पताल में भर्ती कराया। दो दिन इलाज के बाद भी सुधार नहीं हुआ, तो विजय सोमवार को एंबुलेंस से बेटे को लेकर हैलट पहुंचे। करीब एक घंटे की जद्दोजहद के बाद भी वेंटिलेटर नहीं मिला। नार्मल बेड में ही ऑक्सीजन लगा दिया गया।
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कोरोना से रोज हो रहीं मौतें
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इस बीच वे वेंटिलेटर के लिए गुहार लगाते रहे लेकिन कोई इंतजाम नहीं हुआ। उधर, बेटे की हालत खराब होती जा रही थी। डॉक्टरों ने दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी। विजय सीएमओ से पत्र लिखाकर एंबुलेंस से बेटे को स्वरूपनगर के एक अस्पताल लेकर रात करीब नौ बजे पहुुंचे। यहां भी उन्हें वेंटिलेटर नहीं मिला।
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नहीं हो रहा अंतिम संस्कार
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उन्होंने सीडीओ डॉ. महेंद्र कुमार से फोन कराया। इसके एक घंटे बाद सौरभ को अस्पताल में एडमिट किया गया। अस्पताल प्रबंधन ने करीब तीन लाख का खर्चा बताया और 50 हजार रुपये पहले जमा कराए। करीब दो घंटे बाद विजय के सामने ही सौरभ की मौत हो गई।