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चाट खिलाने- घुमाने नहीं ले जाता पति तो कर दिया मुकदमा, एक आरोप इस तरह सोने का भी
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 18 Feb 2018 01:34 PM IST
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डेमो पिक
छोटी-छोटी बातों पर पति-पत्नी के बीच तकरार न्यायालय पहुंची और शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप का दौर। इसके बाद जो हुआ उसको सुनकर प्रोबेशन अधिकारी ने कुछ इस तरह दिया जवाब। आगे पढ़ें क्या है पूरा मामला...
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डेमो पिक
कर्नलगंज में रहने वाली युवती ने अपने पति के खिलाफ पारिवारिक कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया है। समझौता कराने के लिए यह केस प्रोबेशन दफ्तर भेजा गया है। काउंसलिंग के दौरान युवती की शिकायतें चौंकाने वाली रहीं।
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युवती ने कहा कि पति कभी चाट खिलाने, घुमाने और पिक्चर दिखाने नहीं ले जाते। कहने पर काम का बहाना बनाते हैं। छुट्टी वाले दिन घर पर सोते हैं। पति ने काउंसिलिंग में कहा कि वह प्राइवेट काम करता है। छह दिन बहुत मेहनत करनी होती है। सातवें दिन वह आराम करना चाहता है।
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घरेलू हिंसा के मुकदमों में लगातार इजाफा हो रहा है। छोटी-छोटी बातों पर पति-पत्नी के बीच तकरार हो रही है। काउंसलिंग कर विवाद सुलझाने का प्रयास किया जाता है, लेकिन अधिकतर मामलों में समझौता नहीं हो पाता है। ऐसी दशा में फिर यह केस कोर्ट भेज दिए जाते हैं।
रागिनी पांडेय, प्रोबेशन अधिकारी
रागिनी पांडेय, प्रोबेशन अधिकारी
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क्या है घरेलू हिंसा
घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत पीड़िता को क्षतिपूर्ति मिलती है। किसी तरह की कोई सजा का प्रावधान नहीं है। सेक्शन 20 में चिकित्सा, खर्च दिलाने, बच्चों की फीस दिलाने और अन्य प्रकार के मुआवजे का प्रावधान है। सेक्शन 22 में मानसिक और भावनात्मक संकट पर प्रतिकर दिलाया जाता है।
घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत पीड़िता को क्षतिपूर्ति मिलती है। किसी तरह की कोई सजा का प्रावधान नहीं है। सेक्शन 20 में चिकित्सा, खर्च दिलाने, बच्चों की फीस दिलाने और अन्य प्रकार के मुआवजे का प्रावधान है। सेक्शन 22 में मानसिक और भावनात्मक संकट पर प्रतिकर दिलाया जाता है।