बांदा में जमीन की बेइंतहा जिद ने रिश्तों का खून कर दिया। 12 बीघे के लिए शुरू हुई लड़ाई ने मां, भाई का भी लिहाज नहीं रखा। बबेरू कस्बे में रविवार सुबह ने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। बड़े बेटे के बंदूक से जब गोली चली तो कई जिंदगियां जमींदोज हो गईं। कई सपने तहस-नहस हो गए।
परिवार में जमीन के लिए लंबे - समय से अंदरूनी तनाव चल रहा था। ग्रामीणों के अनुसार करीब तीन माह पहले पिता जगदीश ने परिवार की एक जमीन करीब 80 लाख रुपये में बेची थी। इस रकम को चारों बेटों में बराबर बांटते हुए प्रत्येक को 20-20 लाख रुपये दिए गए थे।
इसके बावजूद बड़े बेटे राजकिशोर की नजर बड़े बाबा की 12 बीघा जमीन पर बनी रही। बताया जा रहा है कि वह उस जमीन पर अकेले कब्जा चाहता था। इसी बात को लेकर परिवार में आए दिन विवाद होता था, जिसने खूनी रूप ले लिया।
2 of 11
बांदा में डबल मर्डर के बाद मौके पर पुलिस और अन्य लोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रामीणों का कहना है कि राजकिशोर कुछ समय से एक संगठन से जुड़ गया था। जिससे इलाके में दबदबा बढ़ गया था। ग्रामीणों का कहना है कि इसी मनबढ़ई के कारण ही उसकी इतने बड़े वारदात को अंजाम देने की हिम्मत हो सकी।
3 of 11
बांदा में डबल मर्डर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वहीं, सूचना मिलते ही एसपी पलाश बंसल, क्षेत्राधिकारी कृष्णकांत त्रिपाठी, कोतवाली प्रभारी राजेंद्र सिंह राजावत पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और जांच की। परिवार के लोगों के आंसू नहीं थम रहे हैं। आक्रोशित परिजन ने आरोपी की गिरफ्तारी तक शवों को न उठाने की बात कही। पुलिस अधिकारियों के समझाने-बुझाने के बाद शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। मौके पर पहुंची फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए।
4 of 11
बांदा में डबल मर्डर के बाद मौके पर पुलिस और अन्य लोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हत्यारोपी ने पिता व भाइयों पर दर्ज कराई थी प्राथमिकी
भूमि विवाद शुरू होने के बाद से ही दोनों पक्षों में आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो चुका था। 10 फरवरी 2025 को हत्यारोपी राजकिशोर ने बबेरू थाना में अपने पिता जगदीश, भाई आशीष व देवीदीन के खिलाफ हमलाकर घायल करने की प्राथमिकी भी दर्ज कराई थी।
5 of 11
मां और बेटे के फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जमीन के लालच में भूल गया रिश्तों की मर्यादा, फर्जी अभिलेख बनाने का आरोप
मां और बेटे की हत्या जमीन का सामान्य विवाद नहीं, बल्कि वर्षों से चल रहा गोदनामा, वरासत और हिस्सेदारी, फर्जी अभिलेख बनवाने की बात सामने आई है। परिवार के बड़े सदस्य सत्यनारायण ने अपने भतीजे जगदीश के पुत्र गोविंद को गोद लिया था। गोद लेने के बाद उन्होंने अपने हिस्से की करीब 12 बीघा जमीन गोविंद के नाम वरासत कर दी थी।