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पैरों पर खड़े हुए दिव्यांग, खेली फुटबाल
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 25 Mar 2018 09:02 PM IST
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फुटबाल खेलते दिव्यांग
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुरः अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से रविवार को आयोजित कृत्रिम अंग वितरण शिविर में 42 दिव्यांगों को नि:शुल्क कृत्रिम हाथ, पैर लगाए गए। अपने पैरों पर खड़े होते ही और कृत्रिम हाथ के पंजा मूवमेंट करता देख दिव्यांगों के बुझे चेहरे खुशी से खिल गए। दिव्यांगों ने कृत्रिम पैरों, हाथों को लगाकर फुटबाल, बैडमिंटन खेला, ड्राइविंग भी की। इनमें से किसी का एक्सीडेंट में पैर कटा था तो किसी का थ्रेसर से हाथ। उनके जीवन में आ रहीं दिक्कतें कृत्रिम अंग लगाकर दूर की गईं। बोले, कि अब रोजी रोटी कमा सकेंगे। सपने पूरे कर सकेंगे।
कृत्रिम अंग वितरण शिविर
- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला फाउंडेशन की तरफ से नारायण सेवा संस्थान, केडीएमए और जिला प्रशासन के सहयोग से 10 दिसंबर 2017 को केडीएमए इंटरनेशनल स्कूल बर्रा-8 में विशाल दिव्यांगजन सहायता शिविर और नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया था। इसमें सात हजार से ज्यादा दिव्यांग लाभान्वित हुए थे। शिविर में नारायण सेवा संस्थान, उदयपुर के काउंटर में ऐसे दिव्यांग भी चिन्हित किए गए थे, जिनके हाथ या पैर कटे थे। इन सभी की नाप ली गई थी। संस्थान ने इन सभी के कृत्रिम हाथ, पैर बनाए। इन्हें वितरित करने के लिए रविवार को केडीएमए वर्ल्ड, केशवपुरम में कृत्रिम अंग वितरण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में कैबिनेट मंत्री सतीश महाना, जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह, नगर आयुक्त अविनाश सिंह, अपर जिलाधिकारी सतीश पाल, कोपेस्टेट के चेयरमैन मलिक विजय कपूर, पूर्व विधायक अजय कपूर, केडीएमए के चेयरमैन संजय कपूर ने दिव्यांगों को कृत्रिम पैर, कृत्रिम हाथ न सिर्फ वितरित किए, बल्कि अपने हाथों से लगाए।
दिव्यांगों ने स्कूटी चलाई
कृत्रिम हाथ लगवाने वाले बहादुरपुर (कन्नौज) के वीर सिंह और ग्राम टुमुरकी (हरदोई) के फिरासत अली ने स्कूल के मैदान में स्कूटी चलाई। पैर लगवाने वालों राकेश सिंह, मानवेंद्र सिंह, बीना रावत, परवेज आलमसुरेंद्र सिंह, राकेश, ओमप्रकाश सिंह, श्याम, कुंअर प्रताप सिंह, गुलाब सिंह आदि ने केडीएमए वर्ल्ड स्कूल की टीम के साथ फुटबाल खेली। कुछ दिव्यांगों ने बैडमिंटन भी खेला। नारायण सेवा संस्थान के टीम प्रभारी हरी प्रसाद लड्डा, लौंगर पटेल, मुकेश त्रिपाठी, तकनीशियन उमेश कुमार, प्रोस्थेटिक एंड आर्थोपेडिक डॉक्टर विकास, सुंदर ने अतिथियों को राजस्थानी पगड़ी, पटका देकर सम्मानित किया। केडीएमए के चेयरमैन संजय कपूर ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह दिए। कार्यक्रम का संचालन भारती सिंह ने किया। दिव्यांग हेतु राष्ट्रीय आजीविका सेवा केंद्र के परवेज आलम, केडीएमए वर्ल्ड की प्रधानाचार्य सुप्रिया, केडीएमए इंटरनेशनल की प्रधानाचार्य प्रियंका सहगल, लालीपॉप स्कूल की प्रधानाचार्य रोमी महाजन, इंद्रा शर्मा, भारती सिंह, आरती चंदोक आदि मौजूद रहीं।
दिव्यांगों ने स्कूटी चलाई
कृत्रिम हाथ लगवाने वाले बहादुरपुर (कन्नौज) के वीर सिंह और ग्राम टुमुरकी (हरदोई) के फिरासत अली ने स्कूल के मैदान में स्कूटी चलाई। पैर लगवाने वालों राकेश सिंह, मानवेंद्र सिंह, बीना रावत, परवेज आलमसुरेंद्र सिंह, राकेश, ओमप्रकाश सिंह, श्याम, कुंअर प्रताप सिंह, गुलाब सिंह आदि ने केडीएमए वर्ल्ड स्कूल की टीम के साथ फुटबाल खेली। कुछ दिव्यांगों ने बैडमिंटन भी खेला। नारायण सेवा संस्थान के टीम प्रभारी हरी प्रसाद लड्डा, लौंगर पटेल, मुकेश त्रिपाठी, तकनीशियन उमेश कुमार, प्रोस्थेटिक एंड आर्थोपेडिक डॉक्टर विकास, सुंदर ने अतिथियों को राजस्थानी पगड़ी, पटका देकर सम्मानित किया। केडीएमए के चेयरमैन संजय कपूर ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह दिए। कार्यक्रम का संचालन भारती सिंह ने किया। दिव्यांग हेतु राष्ट्रीय आजीविका सेवा केंद्र के परवेज आलम, केडीएमए वर्ल्ड की प्रधानाचार्य सुप्रिया, केडीएमए इंटरनेशनल की प्रधानाचार्य प्रियंका सहगल, लालीपॉप स्कूल की प्रधानाचार्य रोमी महाजन, इंद्रा शर्मा, भारती सिंह, आरती चंदोक आदि मौजूद रहीं।
कृत्रिम अंग वितरण शिविर
अमर उजाला फाउंडेशन के वॉलंटियर
राकेश श्रीवास्तव, अखिलेंद्र प्रताप सिंह, प्रकाश कुमार, संदीप उत्तम, पंकज निगम, केएम भटनागर, श्रवम कुमार, अनीश निगम, आनंद चतुर्वेदी, शेखर निगम आदि मौजूद रहे।
बातचीत
1980 में थ्रेसर से दाहिना हाथ कट गया था। तब से एक ही हाथ के सहारे जिंदगी काट रहे थे। पहली बार कृत्रिम हाथ लगा। इसी के सहारे स्कूटी चलाने और लोगों से हाथ मिलाने से इतनी ज्यादा खुशी महसूस हो रही है, जिसे शब्दों में बयान नहीं कर सकता। इसके लिए अमर उजाला फाउंडेशन, नारायण सेवा संस्थान, केडीएमए की जितनी प्रशंसा की जाए, कम है।
वीर सिंह, बहादुरपुर, मुरैया बुजुर्ग, कन्नौज
ढाई साल पहले ट्रेन से दोनों पैर कट गए थे। तब से राजमिस्त्री का काम भी नहीं कर पा रहा था। जिंदगी से नाउम्मीद होने लगा था। 10 दिसंबर के कैंप में नारायण सेवा संस्थान ने जांच की थी और आज दोनों कृत्रिम पैर लग गए। अब मैं दुकान कर अपने परिवार का भरणपोषण कर सकूंगा।
विजय, आनंद विहार, नौबस्ता
राकेश श्रीवास्तव, अखिलेंद्र प्रताप सिंह, प्रकाश कुमार, संदीप उत्तम, पंकज निगम, केएम भटनागर, श्रवम कुमार, अनीश निगम, आनंद चतुर्वेदी, शेखर निगम आदि मौजूद रहे।
बातचीत
1980 में थ्रेसर से दाहिना हाथ कट गया था। तब से एक ही हाथ के सहारे जिंदगी काट रहे थे। पहली बार कृत्रिम हाथ लगा। इसी के सहारे स्कूटी चलाने और लोगों से हाथ मिलाने से इतनी ज्यादा खुशी महसूस हो रही है, जिसे शब्दों में बयान नहीं कर सकता। इसके लिए अमर उजाला फाउंडेशन, नारायण सेवा संस्थान, केडीएमए की जितनी प्रशंसा की जाए, कम है।
वीर सिंह, बहादुरपुर, मुरैया बुजुर्ग, कन्नौज
ढाई साल पहले ट्रेन से दोनों पैर कट गए थे। तब से राजमिस्त्री का काम भी नहीं कर पा रहा था। जिंदगी से नाउम्मीद होने लगा था। 10 दिसंबर के कैंप में नारायण सेवा संस्थान ने जांच की थी और आज दोनों कृत्रिम पैर लग गए। अब मैं दुकान कर अपने परिवार का भरणपोषण कर सकूंगा।
विजय, आनंद विहार, नौबस्ता
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कृत्रिम अंग वितरण शिविर
- फोटो : अमर उजाला
24 साल पहले गैस सिलेंडर फटने से बायां पैर कट गया था। 12 साल पहले कृत्रिम पैर लगवाया, पर उससे चलने में दिक्कत हो रही थी। आज के कैंप में नया कृत्रिम पैर लगते ही यह दिक्कत दूर हो गई। मैंने भी केडीएमए ग्राउंड में फुटबाल पर कई किक लगाईं।
बीना रावत, गंगागंज, पनकी
2014 में ट्रेन एक्सीडेंट में बायां पैर कट गया था। लखनऊ में इलाज हुआ। उसी साल 70 हजार रुपये खर्च कर कृत्रिम पैर लगवाया था, पर उससे दिक्कत हो रही थी। आज नया पैर लगते ही न सिर्फ बिना बैशाखी के चलने लगा, बल्कि फुटबाल भी खेली।
फिरासत अली, ग्राम टुमुरकी, हरदोई
28 सितंबर 2015 को करंट लगने के बाद दाहिना हाथ कट गया था। पढ़ाई भी छूट गई थी। धीरे - धीरे कोशिश कर एक हाथ से साइकिल चलाने लगे। आज कृत्रिम हाथ लगते ही बाइक, स्कूटी भी चलाई। इस तरह के शिविर लगते रहने चाहिए, जिनसे दिव्यांग भी अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं।
मानवेंद्र सिंह, ग्राम समथरी, हरदोई
बीना रावत, गंगागंज, पनकी
2014 में ट्रेन एक्सीडेंट में बायां पैर कट गया था। लखनऊ में इलाज हुआ। उसी साल 70 हजार रुपये खर्च कर कृत्रिम पैर लगवाया था, पर उससे दिक्कत हो रही थी। आज नया पैर लगते ही न सिर्फ बिना बैशाखी के चलने लगा, बल्कि फुटबाल भी खेली।
फिरासत अली, ग्राम टुमुरकी, हरदोई
28 सितंबर 2015 को करंट लगने के बाद दाहिना हाथ कट गया था। पढ़ाई भी छूट गई थी। धीरे - धीरे कोशिश कर एक हाथ से साइकिल चलाने लगे। आज कृत्रिम हाथ लगते ही बाइक, स्कूटी भी चलाई। इस तरह के शिविर लगते रहने चाहिए, जिनसे दिव्यांग भी अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं।
मानवेंद्र सिंह, ग्राम समथरी, हरदोई