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पद्मश्री गिरिराज के पुत्र अनीश ने बताया पिताजी ने मेरा और मम्मी का हाथ पकड़ा फिर शांत हो गए
Sun, 09 Feb 2020 11:01 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 09 Feb 2020 11:01 PM IST
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पद्मश्री गिरिराज के शोकाकुल परिजन
- फोटो : अमर उजाला
विधाओं की सीमा से परे अपनी सृजनात्मक क्षमता से अपने आसपास घट रहे दुनियावी सच को अभिव्यक्त करने वाले प्रसिद्घ साहित्यकार गिरिराज किशोर के आखिरी वक्त भी उनका परिवार उनके साथ रहा।
पद्मश्री गिरिराज किशोर को श्रद्धांजलि देते डीएम कानपुर
- फोटो : अमर उजाला
उनके पुत्र अनीश ने बताया कि सुबह जब अचानक उनकी तबियत बिगड़ी तो उन्होंने मेरी मां मीरा किशोर और मेरा हाथ जोर से पकड़ लिया, और कुछ देर बाद ही उनकी सांस थम गई। अनीश के मुताबिक तीन दिन पहले जब उनके पैर में फ्रैक्चर हुआ, उसके बाद वह थोड़ा हताश से दिखे।
पद्मश्री गिरिराज किशोर (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
लेकिन जो लोग भी उनसे मिलने आते थे, उन्हें इस बात का जरा भी एहसास नहीं होने दिया कि वे शारीरिक रूप से तकलीफ में हैं। अपने स्वभाव के अनुसार उस वक्त भी जिन लोगों की बात उन्हें उनके विचार से मेल नहीं खाती थी, बेझिझक मना कर देते।
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पद्मश्री गिरिराज किशोर (फाइल फोटो) एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री
- फोटो : अमर उजाला
रविवार की सुबह से लेकर आखिरी सांस लेने तक वह शांत ही रहे। किसी से कोई बात नहीं की। एक बेटी शिवा मुंबई में रहती हैं, वह रविवार की शाम यहां पहुंचीं। दूसरी बेटी जया अपने पति और बच्चों के साथ यहीं पर थीं। पोतियां ईशा, वान्या के अलावा पोता तन्मय भी उनके आखिरी वक्त में साथ रहे।
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पद्मश्री गिरिराज किशोर का पार्थिव शरीर
- फोटो : अमर उजाला
गिरिराज किशोर की जीवन यात्रा
1937 में उप्र के मुजफ्फरनगर में जन्म हुआ। प्राथमिक शिक्षा भी यहीं पर हुई।
1953 में यूपी बोर्ड इलाहाबाद से हाईस्कूल किया
1956 में यूपी बोर्ड इलाहाबाद से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की
1937 में उप्र के मुजफ्फरनगर में जन्म हुआ। प्राथमिक शिक्षा भी यहीं पर हुई।
1953 में यूपी बोर्ड इलाहाबाद से हाईस्कूल किया
1956 में यूपी बोर्ड इलाहाबाद से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की