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बेहमई: फूलन के गांव में अब नहीं धधकती शराब की भट्ठियां, आखिरकार गांव वालों ने इस धंधे से कर ली तौबा

Wed, 17 Feb 2021 05:19 PM IST
शिखा पांडेय शैलेश अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
शैलेश अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 17 Feb 2021 05:19 PM IST
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40 years of Behmai incident completed, this village is free from drug addiction
बेहमई कांड - फोटो : सोशल मीडिया
कोई 15 साल पहले तक फूलनदेवी के गुढ़ा का पुरवा गांव में घर-घर शराब की भट्ठियां थीं। सूरज ढलते ही लगभग पूरा गांव नशे में झूमने लगता था। आसपास के गांवों में भी शराब सप्लाई की जाती थी। इसी के साथ और विकार भी आ गए थे। बदनामी के चलते इस गांव में कोई अपनी बेटी की शादी करने से भी कतराता था।
40 years of Behmai incident completed, this village is free from drug addiction
बेहमई कांड फाइल फोटो - फोटो : सोशल मीडिया
भगवती देवी प्रधान बनीं तो उन्होंने शराब से गांव का पिंड छुड़ाने का बीड़ा उठाया और सफल जंग लड़ी। जिला प्रशासन ने उनकी सराहना की है। दो बार प्रधान रहीं भगवती देवी ने बताया कि शराब के कारण नई पीढ़ी भी बर्बाद हो रही थी। न तो लड़कों का काम में मन लगता था और न ही पढ़ने में।

 
40 years of Behmai incident completed, this village is free from drug addiction
फूलन देवी (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
कई तो होश संभालते ही नशे के धंधे में कूद पड़े। इससे बड़ी दिक्कत महिलाओं की थी। अभाव में बदले स्वाभाव ने बड़े झगड़े पैदा कर दिए। घर टूटने के कगार पर आ गए। घर-गृहस्थी तबाह होने लगी। भगवती देवी ने संकल्प लिया कि गांव में एक भी शराब की भट्ठी नहीं चलने देंगी, लेकिन इसके लिए बहुत बड़ा संघर्ष करना पड़ा। कोई लड़ने को तैयार हो जाता तो कोई धमकी देकर डराता था।

 
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40 years of Behmai incident completed, this village is free from drug addiction
फूलन देवी (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
भगवती बताती हैं कि वह झुकीं नहीं। गांव की महिलाओं की टोली बनाई और इनका हौसला बढ़ाया। यह इतना आसान काम नहीं था। टोली शराब की भट्ठियों  पर टूट पड़ी। शुरुआत में मुहिम का उपहास बनाया गया, फिर जमकर विरोध किया गया और आखिरकार गांव वालों ने शराब के धंधे से तौबा कर ली।

 
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40 years of Behmai incident completed, this village is free from drug addiction
फूलन देवी (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
बहुत कोशिश की गई, मगर गांव में सरकारी शराब का ठेका भी नहीं खुलने दिया। इसके बाद गांव के हालात सुधरने लगे। कोई खेतीबाड़ी पर ध्यान देने लगा, किसी ने छोटामोटा धंधा कर लिया तो कोई कमाने के लिए बड़े शहर चला गया। अब गांव के विकास की सामूहिक कोशिश हो रही है। गांव में प्राथमिक स्कूल और इंटर कालेज हैं। गांव के जगमोहन कहते हैं कि शराब का धंधा बंद होने के बाद सुधार दिख रहा है। यहां की कोई लड़की फूलन देवी नहीं बनना चाहती पर शोषण के खिलाफ आवाज उठाना सीख गई हैं।

प्रयास रंग लाया
भगवती देवी ने गांव की कुछ महिलाओं के साथ जागरुकता और नशे का धंधा बंद करने की जो मुहिम चलाई, उसका खासा असर पड़ा है। पिछड़ी जाति के लोग भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ भी किसी हद तक मिल रहा है। - रामसेवक, गुढ़ा का पुरवा

 
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