हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर में महाभारत काल से जुड़े पौराणिक कार्तिक पूर्णिमा मेले का मुख्य स्नान पर्व बुधवार को हुआ। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, खादर और ब्रजघाट मेले में 30 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ के सामने प्रशासन की व्यवस्थाएं नाकाफी साबित हुई। जिस कारण श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा।
कार्तिक पूर्णिमा मेलावधि में पश्चिमी उप्र के विभिन्न जनपदों, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान व अन्य प्रदेशों से भक्त मां गंगा के रेतीले मैदान में पहुंचे, जहां उन्हांने तंबुओं के आशियाने बनाकर पड़ाव डाला।
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कार्तिक पूर्णिमा मेला पर गंगा स्नान
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
श्रद्धालुओं ने गोपाष्टमी, आंवला नवमी, एकादशी के बाद कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी के मुख्य पर्वों के साथ ही प्रतिदिन मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। वहीं, कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर भी श्रद्धालुओं ने मेला स्थल और गंगानगरी ब्रजघाट में स्नान कर पुण्यार्जित किया।
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कार्तिक पूर्णिमा मेला पर गंगा स्नान करने आए श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा की गई
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
तड़के शुरू हुआ स्नान का सिलसिला
स्नान का सिलसिला तड़के आरंभ हुआ, जो बुधवार को चलता रहा। इस दौरान तट मां गंगा के जयघोष से गुंजायमान रहे। भक्तों ने स्नान के उपरांत तट पर हवन कर देश समेत परिवार की खुशहाली, बीमारियों, प्राकृतिक आपदाओं से निजात की भी मंगलकामना की।
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कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य स्नान
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वहीं भगवान सत्यनारायण की कथा का श्रवण भी किया। इसके अलावा गंगा तट समेत क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर भंडारों का भी आयोजन हुआ। इस दौरान गंगा के रेतीले मैदान और ब्रजघाट में भक्ति की बयार बहती दिखाई दी।
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कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य स्नान
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के सामने पुलिस-प्रशासन द्वारा की गई सभी व्यवस्थाएं काफी कम साबित हुईं। महिलाओं के लिए कपड़े बदलने के कक्ष, मोबाइल शौचालय, पेयजल व्यवस्था समेत अन्य सुविधाएं श्रद्धालुओं के लिए कम पड़ गए।