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Ghazipur News: तीन माताओं की गोद सूनी, दो घरों के बुझे चिराग, पूजा की खुशियों में मातम; गाजीपुर में हादसा

Thu, 22 May 2025 08:29 PM IST
अमन विश्वकर्मा राहुल सिंह, अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।
राहुल सिंह, अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 22 May 2025 08:29 PM IST
सार

Ghazipur Accident: जिले के नरवर गांव में दर्दनाक हादसे की सूचना पाकर माैके पर एसडीएम सहित कई अधिकारी पहुंच गए थे। लेखपाल को घटना की रिपोर्ट बनाने को निर्देशित कर दिया गया था। हादसे के दूसरे दिन मृतकों और घायलों के परिवार में मातम का माहाैल बना रहा।

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mourning in the houses even on second day after death of four people due to electric shock in Ghazipur
बेटे की लाश को पकड़कर रोता पिता। - फोटो : अमर उजाला

Ghazipur Electric Accident News: गाजीपुर के नरवर गांव में हुए दर्दनाक हादसे ने तीन माताओं की गोद सुनी कर दी। दो घरों के चिराग बुझ गए। दो बेटों को खो चुकी चांदमुनी सदमे में घर के सामने दीवार की नींव पर खामोश बैठी थीं। इकलौते भाई की मौत की खबर सुनकर जिंपी रह-रहकर अचेत हो जा रही थी। पति को खो चुकी पत्नी रीमा रो रही थी तो मां को देख मासूम बेटी भी बिलख उठती थी।



mourning in the houses even on second day after death of four people due to electric shock in Ghazipur
चिता पर अपनों की लाश देख नहीं रूके किसी के आंसू। - फोटो : अमर उजाला

कन्नू यादव के पुत्र रविंद्र यादव उर्फ कल्लू अंतरराष्ट्रीय पहलवान थे। वह अंबेडकर नगर जिले में पुलिस विभाग में सिपाही के पद पर तैनात थे। कन्नू यादव के छोटे बेटे गोरख यादव उर्फ अजय घर पर ही रहते थे। घर पर काशीदास बाबा की पूजा में शामिल होने के लिए तीन दिन पूर्व रविंद्र यादव घर आए थे।

mourning in the houses even on second day after death of four people due to electric shock in Ghazipur
पति की माैत से महिला हो गई बेहोश। - फोटो : अमर उजाला

सुबह बांस में आम का पल्लव बांधने के बाद मंडप में खड़ा करते समय हाइटेंशन तार की चपेट में आने से रविंद्र यादव, गोरख यादव और हीरालाल यादव के बेटे अमन की अस्पताल में मौत हो गई। दोनों बेटों की मौत की खबर पर मां चांदमुनी देवी घर के बाहर सड़क किनारे दीवार की नींव पर खामोश बैठी थीं।

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mourning in the houses even on second day after death of four people due to electric shock in Ghazipur
इसी मंडप के किनारे लगनी थी बांस। - फोटो : अमर उजाला

महिलाएं उन्हें बुलवाने का प्रयास कर रही थीं, लेकिन बेटों की मौत का उन्हें ऐसा सदमा लगा कि आंसू तक सूख गए। इधर, बेटी पारो को गोद में लेकर रविंद्र की पत्नी रीमा पति को याद कर बिलख रही थी। मां को रोते देख एक वर्षीय पारो भी रह-रहकर बिलख उठती थी।

कुछ दूरी पर इकलौते भाई अमन यादव को याद कर बहन नीतू, पिंकी और जिंपी रोते-रोते अचेत हो जा रही थीं। मां सुनीता की स्थिति ऐसी हो गई थी कि जो देख रहा था, उसका कलेजा फट जा रहा था।

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mourning in the houses even on second day after death of four people due to electric shock in Ghazipur
इसी बांस के सहारे बनाई जा रही थी मंडप। - फोटो : अमर उजाला

आंखों से बहते आंसू बयां कर रहे थे मित्रों के खोने का गम
परिवार व समाज से परे होती है मित्रता। कुछ ऐसा ही दृश्य नरवर गांव में देखने को मिला। हादसे में मित्रों को खोने का गम कांपती जुबान व आंखों से बहते आंसू दर्द की कहानी बयां कर रहे थे। कोई रात में आयोजन स्थल पर तैयारियों में साथ-साथ रहने तो कोई फोन न उठा पाने की पीड़ा से सिसकता दिखाई पड़ा।

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