मैंने पापा को बहुत समझाया था... वो मुकदमे और बदनामी से इस कदर टूट चुके थे कि उनका दिल शिकोहाबाद में नहीं लग रहा था। मैंने उनसे यहां तक कह दिया था कि पापा, आप परेशान मत हो, हम शिकोहाबाद की ये कोठी और अपनी सभी संपत्तियां बेच देंगे और ये देश छोड़कर नेपाल जाकर हमेशा के लिए बस जाएंगे। वहां हमें कोई नहीं जानेगा, कोई ताना नहीं मारेगा... मगर पापा ने मेरी एक न सुनी और हमेशा के लिए हमें छोड़कर चले गए।
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मां की हत्या और पिता की खुदकुशी के बाद जानकारी देतीं बेटी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कोर्ट से आकर पापा ने नहीं खाया खाना
शनिवार रात सुभाष तिराहा स्थित आवास पर जब फॉरेंसिक टीम और पुलिस जांच कर रही थी, तब राकेश यादव की बड़ी बेटी गरिमा रो-रोकर वहां मौजूद हर शख्स को अपनी वही आखिरी बातचीत बता रही थी, जो उसने अपने पिता को अवसाद से निकालने के लिए की थी। गरिमा ने बताया कि शनिवार शाम को जब राकेश यादव कोर्ट की तारीख से लौटे, तो वह बेहद गुमसुम थे। खाना भी नहीं खाया था।
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राकेश यादव की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मुकदमे के बाद से छोड़ दिया था पैतृक गांव, बेटियों के साथ रहने लगे थे
इस घटना ने न केवल दो जिंदगियों को खत्म किया। बल्कि एक हंसते-खेलते और उच्च शिक्षित परिवार को भी पल भर में उजाड़ कर रख दिया। मुकदमे की विधिक कार्रवाई और सामाजिक बदनामी के डर से राकेश इस कदर टूट चुके थे कि उन्होंने अपना पैतृक गांव डाहिनी तक छोड़ दिया था और इस संकट की घड़ी में उन्होंने अपनी शादीशुदा बेटियों को भी अपने पास ही रख लिया था, ताकि परिवार एक साथ रहकर इस विधिक लड़ाई का सामना कर सके।
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हत्या और खुदकुशी के बाद विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
परिवार में कौन क्या करता है?
राकेश यादव की बड़ी बेटी गरिमा यादव की ससुराल सिरसागंज में है और उनके पति पेशे से प्रतिष्ठित डॉक्टर हैं। वहीं, उनकी छोटी बेटी प्रतिमा यादव शिक्षा विभाग में सरकारी शिक्षिका हैं, जो वर्तमान में कुटुकपुर बरियार मऊ के सरकारी स्कूल में तैनात हैं। प्रतिमा यादव के पति यानी राकेश यादव के छोटे दामाद विवेक यादव भी शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हैं और वह धनपुरा में सरकारी शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं।
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हत्या और खुदकुशी के बाद विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बराबर के घर में रहती हैं सगी बहन, चीख सुनकर दौड़ा भांजा
राकेश यादव ने शिकोहाबाद में जिस घर में इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया, ठीक उसी मकान के बराबर में उनकी सगी बहन सुमन यादव का भी घर है। सुमन यादव अपने बेटे गौरव (राकेश यादव के भांजे) के साथ वहां रहती हैं। शनिवार रात करीब 9:30 बजे जब राकेश के कमरे से गोलियां चलीं और बेटियों की चीख-पुकार गूंजी, तो बराबर के मकान से बहन सुमन और भांजा गौरव भी बदहवास हालत में दौड़कर मौके पर पहुंचे। लेकिन तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था और राकेश यादव दम तोड़ चुके थे।