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Firozabad News: कैंपिंग कोच में आग की तीन घंटे चली जांच, कारणों के करीब पहुंची टीम
Sun, 13 Sep 2026 11:41 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Sun, 13 Sep 2026 11:41 PM IST
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जले हुए कोच का निरीक्षण करती जांच टीम। स्रोत संवाद
- फोटो : जले हुए कोच का निरीक्षण करती जांच टीम। स्रोत संवाद
शिकोहाबाद (फिरोजाबाद)। ट्रैक मेंटेनेंस कैंपिंग कोच में लगी आग के कारणों का पता लगाने के लिए रविवार को चार सदस्यीय जांच टीम शिकोहाबाद पहुंची। टीम ने करीब तीन घंटे तक जले हुए कोच का बारीकी से निरीक्षण किया। कोच के अंदर आग से जले उपकरणों और अन्य सामान की स्थिति को देखा। यहां टीम ने पाया कि कोच के अंदर खाना बनाने का सामान भी रखा हुआ था। इसके अलावा कोच के बाहर भी कई अहम साक्ष्य जांच टीम को मिले हैं। टीम आग के कारणों के करीब पहुंच चुकी है।
शनिवार दोपहर ट्रैक मेंटेनेंस कैंपिंग कोच में अचानक आग लग गई थी। आग इतनी भीषण थी कि कोच के अंदर रखा काफी सामान जलकर राख हो गया। घटना के अगले दिन रविवार को चार सदस्यीय जांच टीम सुबह 10 बजे करीब शिकोहाबाद पहुंची। जिनमें सहायक मंडल यांत्रिक इंजीनियर टूंडला (एडीएमई) विद्याभूषण, सहायक मंडल इंजीनियर इटावा (एडीईएन) आरपी सिंह, सहायक मंडल विद्युत इंजीनियर कानपुर (एडीईई कोचिंग) पवन कुमार, सहायक मंडल इंजीनियर टूंडला (एडीईई जी) विजय कुमार के अलावा सहायक परिचालन प्रबंधक दादरी (एओएम) पीपी त्रेहन शामिल थे। सबसे पहले टीम ने स्टेशन अधीक्षक कार्यालय में रेलवे अधिकारियों के साथ घटना के बारे में विचार-विमर्श किया। इसके बाद टीम जले हुए कोच के पास पहुंची और अंदर जाकर करीब तीन घंटे तक जांच की।
निरीक्षण के दौरान कोच के अंदर फ्रिज, एसी का इंडोर यूनिट, इन्वर्टर-बैटरी, कंबल समेत कई सामान पूरी तरह जला मिला। खाना पकाने के बर्तन, अग्निशमन यंत्र और फायर बॉल भी आग की चपेट में आकर खराब हो चुके थे, जोकि कोच के बाहर मालगोदाम पर रखे हुए मिले। मतलब साफ है कि कोच के अंदर ही खाना पकाया जाता था। जांच टीम ने कोच के अंदर और आसपास की स्थिति को भी बारीकी से देखा। कोच के बाहर कुछ लोगों के जूते-चप्पल और चश्मे पड़े मिले। इसके अलावा बाहर बीयर के कैन भी पड़े होने की बात सामने आई है। हालांकि यह कैन किसी अन्य के द्वारा भी यहां फेंके जाने की आशंका जताई गई है। यह कैन कोच के अंदर से ही बाहर फेंकी गई हैं, इस बात को जांच टीम ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया है लेकिन जांच टीम ने इन सभी बिंदुओं को अपनी जांच में शामिल किया है।
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मशीन के रिकॉर्ड भी जले
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आग में रेलवे की ट्रैक टेपिंग मशीन (टीटीएम) से संबंधित महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी जलकर राख हो गए हैं। रिकॉर्ड के नष्ट होने से मशीन से जुड़े कार्यों और दस्तावेज को भी नुकसान पहुंचा है। जांच टीम ने जले हुए रिकॉर्ड और कोच में क्षतिग्रस्त उपकरणों की स्थिति को भी अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है।
घायल युवक के पास नहीं था रेल टिकट
कोच में आग लगने की घटना के दौरान युवक राहुल ट्रैक के पास खड़े होकर मोबाइल से वीडियो बना रहा था। वह सिलिंडर फटने की घटना में घायल हो गया था। वह अपने छोटे भाई गुलशन के साथ दिल्ली जा रहा था। रेलवे के अधिकारियों की जांच में यह भी सामने आया है कि उसके पास रेलवे का टिकट नहीं था। इस कारण रेल प्रशासन ने उसे रेलयात्री मानने से भी इन्कार किया है।
कोच में लगी आग की जांच टीम जांच कर रही है। अभी आग लगने के कारणों के अंतिम नतीजों पर टीम नहीं पहुंची है। जांच टीम अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इसके बाद ही कारणों को स्पष्ट किया जा सकेगा। वहीं इस घटना में घायल हुए युवक के पास यात्रा के लिए कोई भी वैध टिकट नहीं था। रेलवे के नियमों के अनुसार वैध टिकट वाले व्यक्ति को ही रेलयात्री माना जाता है।
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शनिवार दोपहर ट्रैक मेंटेनेंस कैंपिंग कोच में अचानक आग लग गई थी। आग इतनी भीषण थी कि कोच के अंदर रखा काफी सामान जलकर राख हो गया। घटना के अगले दिन रविवार को चार सदस्यीय जांच टीम सुबह 10 बजे करीब शिकोहाबाद पहुंची। जिनमें सहायक मंडल यांत्रिक इंजीनियर टूंडला (एडीएमई) विद्याभूषण, सहायक मंडल इंजीनियर इटावा (एडीईएन) आरपी सिंह, सहायक मंडल विद्युत इंजीनियर कानपुर (एडीईई कोचिंग) पवन कुमार, सहायक मंडल इंजीनियर टूंडला (एडीईई जी) विजय कुमार के अलावा सहायक परिचालन प्रबंधक दादरी (एओएम) पीपी त्रेहन शामिल थे। सबसे पहले टीम ने स्टेशन अधीक्षक कार्यालय में रेलवे अधिकारियों के साथ घटना के बारे में विचार-विमर्श किया। इसके बाद टीम जले हुए कोच के पास पहुंची और अंदर जाकर करीब तीन घंटे तक जांच की।
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निरीक्षण के दौरान कोच के अंदर फ्रिज, एसी का इंडोर यूनिट, इन्वर्टर-बैटरी, कंबल समेत कई सामान पूरी तरह जला मिला। खाना पकाने के बर्तन, अग्निशमन यंत्र और फायर बॉल भी आग की चपेट में आकर खराब हो चुके थे, जोकि कोच के बाहर मालगोदाम पर रखे हुए मिले। मतलब साफ है कि कोच के अंदर ही खाना पकाया जाता था। जांच टीम ने कोच के अंदर और आसपास की स्थिति को भी बारीकी से देखा। कोच के बाहर कुछ लोगों के जूते-चप्पल और चश्मे पड़े मिले। इसके अलावा बाहर बीयर के कैन भी पड़े होने की बात सामने आई है। हालांकि यह कैन किसी अन्य के द्वारा भी यहां फेंके जाने की आशंका जताई गई है। यह कैन कोच के अंदर से ही बाहर फेंकी गई हैं, इस बात को जांच टीम ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया है लेकिन जांच टीम ने इन सभी बिंदुओं को अपनी जांच में शामिल किया है।
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मशीन के रिकॉर्ड भी जले
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आग में रेलवे की ट्रैक टेपिंग मशीन (टीटीएम) से संबंधित महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी जलकर राख हो गए हैं। रिकॉर्ड के नष्ट होने से मशीन से जुड़े कार्यों और दस्तावेज को भी नुकसान पहुंचा है। जांच टीम ने जले हुए रिकॉर्ड और कोच में क्षतिग्रस्त उपकरणों की स्थिति को भी अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है।
घायल युवक के पास नहीं था रेल टिकट
कोच में आग लगने की घटना के दौरान युवक राहुल ट्रैक के पास खड़े होकर मोबाइल से वीडियो बना रहा था। वह सिलिंडर फटने की घटना में घायल हो गया था। वह अपने छोटे भाई गुलशन के साथ दिल्ली जा रहा था। रेलवे के अधिकारियों की जांच में यह भी सामने आया है कि उसके पास रेलवे का टिकट नहीं था। इस कारण रेल प्रशासन ने उसे रेलयात्री मानने से भी इन्कार किया है।
कोच में लगी आग की जांच टीम जांच कर रही है। अभी आग लगने के कारणों के अंतिम नतीजों पर टीम नहीं पहुंची है। जांच टीम अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इसके बाद ही कारणों को स्पष्ट किया जा सकेगा। वहीं इस घटना में घायल हुए युवक के पास यात्रा के लिए कोई भी वैध टिकट नहीं था। रेलवे के नियमों के अनुसार वैध टिकट वाले व्यक्ति को ही रेलयात्री माना जाता है।