बुलंदशहर के नरसेना थाना इलाके के नित्यानंदपुर नंगली गांव में बुधवार को हवा भी भारी थी। गांव का हर घर अंधेरे में डूबा था, हर आंख नम थी, हर जुबान पर एक ही सवाल था.. आखिर इतनी क्रूरता कहां से आई? नन्हे से बालक का गया घोंटते वक्त उसके हाथ भी क्यों नहीं कांपे?
पुष्पेंद्र और उनकी पत्नी का जीवन उनके 18 महीने के बेटे माधव के इर्द गिर्द घूमता था। माधव उनका चिराग, उनकी सबसे बड़ी हंसी, उनकी आंखों का तारा था। जब वह आंगन में अपने छोटे छोटे कदमों से दौड़ता था तो पुष्पेंद्र को अपनी खेती की सारी थकान भूल जाती थी।
2 of 13
मासूम माधव की हत्या के बाद मौजूद लोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मंगलवार की शाम जब दिन डूब रहा था, माधव खेल रहा था। एक पल की चूक... और वह गायब हो गया। पुष्पेंद्र और उनकी पत्नी के लिए तो जैसे सांस लेना मुश्किल हो गया।
3 of 13
इसी संदूक में मिला था मासूम का शव
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
माधव... ओ मेरे लाल! उनकी आवाज गांव की गलियों में पागलों की तरह भटकती रही। वे हर घर का दरवाजा खटखटाते, हर पड़ोसी से पूछते। इस दिल दहला देने वाली तलाश के दौरान एक चेहरा जो सबसे आगे था, वह था उनका पड़ोसी अंकुश। वह हर जगह उनके साथ था।
4 of 13
मासूम माधव की हत्या के बाद विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उसके चेहरे पर वैसी ही चिंता थी, जैसी अपनों के खो जाने पर होती है। वह कंधे से कंधा मिलाकर, ढांढस बंधाकर, उनके दर्द में शामिल होने का दिखावा करता रहा। पुष्पेंद्र ने सोचा संकट में पड़ोसी ही काम आता है लेकिन उन्हें नहीं पता था कि जिस कंधे पर वे सहारा ढूंढ रहे थे वह तो उनके दर्द का सूत्रधार था।
5 of 13
मासूम माधव की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रात अंधेरी और लंबी होती गई। जब पुलिस को संदेह हुआ और वे अंकुश के घर पहुंचे तो अंकुश ने बिना विरोध दरवाजा खोल दिया। फिर पुलिस की निगाहें घर के कोने में रखे एक पुराने भारी संदूक पर पड़ीं।