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विश्व धरोहर दिवस: प्राचीन धरोहरों की धरती है बिजनौर, महाभारत काल से भी जुड़ा रहा है नाता

Mon, 18 Apr 2022 03:55 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 18 Apr 2022 03:55 PM IST
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World Heritage Day: Bijnor is the land of ancient heritage, has also been associated with Mahabharata period
चार मीनार-बिजनौर - फोटो : amar ujala

उत्तर प्रदेश का बिजनौर आज भी तमाम प्राचीन धरोहर को संजोए हुए हैं। महाभारत काल से भी जिले की धरती का जुड़ाव रहा हैं। प्राचीन स्थल जिले में आज भी मौजूद है। कुछ के निशान बाकी रह गए हैं तो कुछ अभी भी सही सलामत खड़े हैं, जिन्हें संरक्षण की जरुरत है। बिजनौर का सैंदवार गांव महाभारत काल का सैन्य द्वार कहा जाता है। यहां पर गुरु द्रोणाचार्य का आश्रम था, जहां पर कौरव और पांडवों ने शिक्षा ली। इस गांव में एक तालाब को आज भी द्रोण ताल के नाम से पुकारा जाता है। 



धराशायी हो रही चार मीनार
नजीबाबाद में नवाब नजीबुद्दौला ने चार मीनार का भी निर्माण कराया था। चार मीनार के बीच का गुंबद धराशायी हो चुका है, लेकिन चार मीनार अभी भी खड़ी हुई है जो नजीबाबाद के सुंदर अतीत की गवाही देती है। हालांकि ये भी भारतीय पुरातत्व विभाग की देखरेख में शामिल थी। 
 

World Heritage Day: Bijnor is the land of ancient heritage, has also been associated with Mahabharata period
नवाब नजीबुद्दौला द्वारा बनाया गया पत्थर गढ़ का किला-बिजनौर - फोटो : amar ujala

पत्थर गढ़ का किला
नजीबाबाद में गांव महावतपुर के पास पत्थर गढ़ का किला आज भी मौजूद है। इसका निर्माण 1752 में नवाब नजीबुद्दौला ने कराया था। जिसे बाद में डाकू सुल्ताना ने अपनी शरण स्थली बना लिया। अब डाकू सुल्ताना का किले के नाम से जाना जाता है जो भारतीय पुरातत्व विभाग की देखरेख में है। 

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World Heritage Day: Bijnor is the land of ancient heritage, has also been associated with Mahabharata period
पारसनाथ किला-बिजनौर - फोटो : amar ujala

पारसनाथ किला
बढ़ापुर के पास काशीवाला के खेतों में आज भी पारसनाथ किले के अवशेष निकलते हैं। खुदाई के दौरान जैन धर्म से जुड़ी खंडित मूर्तियां, मंदिरों और किले अवशेष निकलते हैं। प्राचीन समय में यह जैन आचार्यों की स्थली रहा है। या किसी जैन राजा का साम्राज्य होने की गवाही देते हैं। फिलहाल यहां जैन धर्म का मंदिर बना हुआ है।

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World Heritage Day: Bijnor is the land of ancient heritage, has also been associated with Mahabharata period
कण्व ऋषि मंदिर बिजनौर - फोटो : amar ujala

महाभारत से जुड़ा है विदुरकुटी का इतिहास
हस्तिनापुर राजसभा में मंत्री महात्मा विदुर महाभारत होने से पहले दारानगर गंज के पास आ गए थे। यहां विदुर कुटी में रहे। भगवान श्रीकृष्ण ने दुर्योधन का 56 भोग त्यागने के बाद विदुरकुटी आकर बथुए का साग खाया। विदुरकुटी में अभी भी पूरे साल बथुआ हरा-भरा रहता है।

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सती का मठ-बिजनौर - फोटो : amar ujala

मुगलकाल की गवाही देते हैं सती मठ
रेहड़ के पास मुगलकाल में बने सती मठ आज जर्जर हालत में है। बताया जाता है कि मुगलकाल में यहां के राजा की रानियां सती हो गई थीं। रेहड़ रियासत के राजाओं ने मुगलसेना से संघर्ष किया था। वहीं ये मठ सैकड़ों साल पुराने बताए जाते हैं। 

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