आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार की फरमानी नाज ने अपनी आवाज से दुनिया में पहचान बनाई है। तहेरे भाई भूरे की ढोलक ने फरमानी नाज को रातोंरात सुरों की रानी बना दिया।
लता मंगेशकर के गाए फिल्म हीर रांझा के गीत मिलो न तुम तो हम घबराएं को पहली बार गुनगुनाने वाली फरमानी नाज की अपनी अलग पहचान है। फरमानी नाज ने स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि आर्थिक तंगी झेल रहे परिवार को उनके द्वारा गुनगुनाए एक गीत के जरिए इतनी शोहरत मिलेगी कि वह लोगों के दिलों की धड़कन बन जाएगी।
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अपनी टीम के साथ फरमानी नाज।
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बिजनौर में नगर में एक कार्यक्रम में अपने भाई फरमान, तहेरे भाई भूरे और राहुल मुलेड़ा के साथ पहुंचीं फरमानी नाज ने बताया कि वह बचपन से लता मंगेशकर के गाए गीत गुनगुनाती थीं। पति को गीत गाना पसंद नहीं था, अन्य पारिवारिक परिस्थितियों में तालमेल न बैठने की वजह से दोनों अलग हुए।
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फरमानी नाज
- फोटो : सोशल मीडिया
उनका तहेरा भाई भूरा ढोलक बजाने और गीत गुनगुनाने के साथ अपने परिवार की आजीविका चलाता था। अचानक राहुल मुलेड़ा भूरे के ढोलक वादन से प्रभावित हुए। भूरे के जरिए भाई फरमान राहुल के संपर्क में आए। परिवार आर्थिक संकटों से जूझ रहा था, बेटा गंभीर बीमारी से पीड़ित था।
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फरमानी नाज
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ग्रामीण परिवेश में चौका-चूल्हा करते हुए अचानक राहुल मुलेड़ा ने उनका गीत मिलो न तुम तो हम घबराएं.. रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डाल दिया। इस गीत के जरिये वह आज उस मुकाम पर हैं कि उसे हर कोई पहचानने लगा है।
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फरमानी नाज
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फरमानी बताती हैं कि उन्हें दुनिया से रूबरू कराने में प्रोड्यूसर के रूप में राहुल मुलेड़ा का विशेष योगदान है। उन्होंने हाल ही में एक गीत लिखकर उसे आवाज दी है। 26 जनवरी तक उनका गीत खुशियां लुटाएंगे, झूमेंगे गाएंगे, घर-घर लहराएंगे तिरंगा.. दिलों की आवाज बनेगा।