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ऐसा सरकारी स्कूल: चार साल पहले नहीं आते थे बच्चे, अब लगाना पड़ा 'नो एडमिशन' का बोर्ड, ये है पूरा मामला

Thu, 19 Aug 2021 06:23 PM IST
Dimple Sirohi मुनीश राणा, अमर उजाला, बिजनौर
मुनीश राणा, अमर उजाला, बिजनौर Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 19 Aug 2021 06:23 PM IST
सार

बिजनौर के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने विद्यालय की सूरत ऐसी बदली कि एडमिशन के लिए मारामारी मच गई। आखिरकार स्कूल के बाहर 'नो एडमिशन' का बोर्ड लगाना पड़ा।  

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Bijnor teacher changed the face of the Government school, No admission, board had to be installed after fight for entry
बिजनौर का सरकारी स्कूल - फोटो : अमर उजाला

हौसला और ड्यूटी के प्रति कर्तव्यनिष्ठा हो तो क्या कुछ नहीं हो सकता। उत्तर प्रदेश के बिजनौर में ऐसी ही कर्तव्यनिष्ठा निभाते हुए एक शिक्षक ने अपने दो सहायक शिक्षकों के साथ मिलकर उच्च प्राथमिक स्कूल इब्राहिमपुर सादो की शिक्षा और व्यवस्था की ऐसी सूरत बदली कि स्कूल मे 35 बच्चों की संख्या बढ़कर 188 पहुंच गई। लोगों ने प्राइवेट स्कूलों से निकालकर सरकारी स्कूल में बच्चों के दाखिले कराए। एडमिशन के लिए मारामारी मची तो तो स्कूल के बाहर नो एडमिशन तक का बोर्ड लगाना पड़ा। 



नहटौर ब्लॉक के गांव इब्राहिमपुर सादो उर्फ अलीनगर के उच्च प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की संख्या क्षमता से अधिक होने पर स्कूल के बाहर नो एडमिशन का बोर्ड लगा दिया गया है। उच्च प्राथमिक विद्यालय के बाहर नो एडमिशन का बोर्ड लगा होने की बात पर शायद यकीन करना मुश्किल हो, लेकिन विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य रामअवतार सिंह ने यह सच कर दिखाया है। दो सहायक शिक्षक मुनीश कुमार व बीना ऋषि के साथ मिलकर ऐसी शिक्षा और व्यवस्था बनाई कि स्कूल की 35 बच्चों की संख्या बढ़कर 188 हो गई और ब्लॉक का एकमात्र इंग्लिश मीडियम उच्च प्राथमिक विद्यालय बन गया।

Bijnor teacher changed the face of the Government school, No admission, board had to be installed after fight for entry
बिजनौर का सरकारी स्कूल, Government school Bijnor - फोटो : Amar Ujala Meerut

ऐसी शिक्षाओं को देखकर अभिभावकों ने अपने बच्चों को विद्यालय में भेजना शुरू किया। अभिभावक शमा, साजिया, सलीम अहमद, अनवार, पूर्व ग्राम प्रधान इसरार अहमद आदि ने बताया कि स्कूल में प्राइवेट स्कूल से भी अच्छी शिक्षा व्यवस्था है। इसी को लेकर अब गांव के बच्चे प्राइवेट विद्यालयों में से हटकर उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यहां से निकले छात्र दसवीं कक्षाओं में भी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। 

प्रभारी प्रधानाचार्य रामअवतार सिंह ने बताया कि उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 6 में 60 बच्चे, कक्षा 7 में 57 और कक्षा 8 में 71 बच्चे हैं। विद्यालय में तीन ही कमरे हैं। क्षमता के अनुरूप ही प्रवेश लिए जा सकते हैं। इसीलिए अब प्रवेश बंद करने पड़े हैं।

Bijnor teacher changed the face of the Government school, No admission, board had to be installed after fight for entry
बिजनौर का सरकारी स्कूल - फोटो : अमर उजाला

चार साल पहले स्कूल को नहीं मिलते थे बच्चे
उच्च प्राथमिक विद्यालय इब्राहिमपुर सादो उर्फ अली नगर की तस्वीर चार वर्ष पूर्व कुछ अलग ही थी। विद्यालय में मात्र 35 बच्चे थे। विद्यालय की बागडोर शिक्षक राम अवतार सिंह के हाथों में आई। उन्होंने अपने दो सहायक शिक्षकों के साथ मिलकर सबसे पहले उच्च प्राथमिक विद्यालय की भूमि पर अवैध कब्जे को हटवाते हुए विद्यालय की सूरत बदलनी शुरू की।

उन्होंने विद्यालय में संचालित कक्षा छह से आठ तक तीनों कक्षाओं को स्मार्ट क्लास बनाना शुरू किया। इसमें उन्होंने सामाजिक सहयोग व अपने योगदान से इन स्मार्ट क्लासों को बनाकर उनमें एलईडी लगवाई। विद्यालय में एलईडी के अलावा सीसीटीवी कैमरे, बहु गतिविधियां कक्ष स्थापित किया।

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Bijnor teacher changed the face of the Government school, No admission, board had to be installed after fight for entry
 स्कूल के शिक्षक राम अवतार सिंह - फोटो : अमर उजाला

ग्रामीणों में जगाया अच्छी शिक्षा का भरोसा
प्राइवेट विद्यालयों की तरह ही उच्च प्राथमिक विद्यालय में भी ऐसी व्यवस्थाओं को विकसित किया गया और शिक्षा के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया गया। उन्हें अच्छी शिक्षा का भरोसा दिलाया गया। स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को शिक्षा देनी शुरू की, जिससे उच्च प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की संख्या बढ़ी।

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बिजनौर का सरकारी स्कूल - फोटो : अमर उजाला

जिला स्तर पर 16 और मंडल स्तर पर 8 गोल्ड जीत चुके स्कूल के बच्चे
वर्ष 2019 में बिजनौर में आयोजित परिषदीय क्रीड़ा प्रतियोगिता में जनपद स्तर पर 16 एवं मंडल स्तर पर आठ बच्चों ने गोल्ड मेडल जीते। विद्यालय में एक लैब विकसित की गई, जिसमें बच्चे गतिविधियों के माध्यम से नए-नए प्रोजेक्ट तैयार करने में लगे।  शिक्षक ने स्कूल के 7 बच्चों की स्वास्थ्य विभाग के नाम से एक टीम बनाई। जिनको बिजनौर के एक निजी अस्पताल में ट्रेनिंग दिलाई गई। ये बच्चे फर्स्ट ऐड के लिए एक्सपर्ट किए गए।

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