बदायूं में एचपीसीएल प्लांट में हुई दो अफसरों की हत्या के मामले में खुलासा हुआ है। बदायूं इलाके के एक नेता की शह पर उनके भाई ने कंपनी के प्लांट को गुर्गों के जरिये हाईजैक कर रखा था। प्लांट में न तो स्थानीय स्तर पर माल की आपूर्ति हो पा रही थी और न ही कामगार ढंग से काम कर रहे थे। व्यवस्था बेपटरी कर दी गई, जिसे दुरुस्त करने की कोशिश में दोनों अफसरों की जान चली गई।
मूसाझाग के सैजनी में बनाए गए इस प्लांट का श्रेय तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह को जाता है। इसके साथ ही इलाके के नेताओं ने भी प्लांट स्थापना का श्रेय लेने की कोशिश की थी। 27 जनवरी 2024 को प्लांट शुरू हुआ तो डीजीएम मृगांक सिन्हा थे।
2 of 14
एचपीसीएल प्लांट में दोहरे हत्याकांड के बाद बाहर तैनात पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बताते हैं कि उस दौरान स्थानीय नौजवानों को रोजगार देने की बात कही गई थी, लेकिन इसके लिए सूची एक नेता के भाई के पास से आती थी। अजय के परिवार के ही करीब दस लोगों को रोजगार दिया गया। इन लोगों को जरूरत से ज्यादा पगार दी जाती थी।
3 of 14
एचपीसीएल प्लांट में दोहरे हत्याकांड के बाद तैनात पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सूत्र बताते हैं कि नेता के घर काम करने वाले माली, नौकरों से लेकर ड्राइवरों तक की तैनाती कागजों में प्लांट में चल रही थी। वह कंपनी से पगार पाने के साथ ही काम नेता व उसके भाई के घर पर किया करते थे।
4 of 14
आरोपी अजय प्रताप सिंह
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एक पार्टी से जुड़े कुछ पदाधिकारियों के नाम भी कर्मचारी बतौर दर्ज होने की बात कंपनी सूत्रों से सामने आई है। धान की खेती सीमित होने से पराली स्थानीय स्तर पर बेहद कम मिल रही थी तो प्लांट संचालन में दिक्कत आ रही थी।
5 of 14
मृतक सुधीर गुप्ता की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ऐसे में पंजाब, शाहजहांपुर व पीलीभीत से पराली मंगाकर बॉयो गैस बनाना काफी महंगा पड़ रहा था। ऊपर से कर्मचारियों की हठधर्मिता हावी थी। इससे परेशान होकर सुधीर गुप्ता ने वीआरएस लेने के लिए आवेदन कर दिया था। इस महीने के अंत में उनका नौकरी छोड़ना तय था। हर्षित ने भी सुधीर गुप्ता की तरह प्लांट की व्यवस्था पटरी पर लाने के लिए मेहनत की, लेकिन सफल नहीं हो सके। नतीजा दोनों की मौत के रूप में सामने आया।