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खौफ के साये में 45 गांव: गन्ने के खेतों में बाघों का डेरा, दहाड़ से ग्रामीणों की उड़ी नींद, ड्रोन से निगरानी

Wed, 04 Sep 2024 04:01 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला नेटवर्क, लखीमपुर खीरी
अमर उजाला नेटवर्क, लखीमपुर खीरी Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 04 Sep 2024 04:01 PM IST
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Tigers in sugarcane farms monitored through drone cameras in Lakhimpur kheri
गन्ने के खेत में बाघ - फोटो : अमर उजाला

लखीमपुर खीरी में इन दिनों मोहम्मदी-महेशपुर रेंज के कई गांवों में बाघ की दहाड़ सुनी जा रही है। हमले में कई लोग घायल हो चुके हैं। एक सप्ताह पहले इमलिया गांव निवासी युवक की जान भी बाघ के हमले में जा चुकी है। मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं रोकने को वन विभाग कवायद में जुटा है। बाघों के आबादी में आने और हमलावर होने की बड़ी वजह बाढ़ बताई जा रही है। जिले में करीब दो महीने से शारदा, घाघरा, मोहाना, सुहेली नदियां उफान पर हैं। गांव कट रहे और पानी जंगल में भरा है। जंगल में जलभराव होने से वन्यजीव जंगल से बाहर निकल रहे हैं। प्रभावित इलाकों में ड्रोन से निगरानी कराई जा रही है। पिंजरे भी लगाए गए हैं। 

Tigers in sugarcane farms monitored through drone cameras in Lakhimpur kheri
पलिया-भीरा मार्ग पर पानी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
जुलाई के पहले सप्ताह में हुई बारिश और बैराज से छोड़े गए पानी से जिले में बाढ़ आई थी। 200 से अधिक गांवों और दुधवा जंगल में पानी भर गया। शारदा और घाघरा के अलावा छोटी नदियां भी उफना गईं। नदियों का पानी लंबे समय तक जंगल में भरा रहा। पानी भरने के बाद सूखी जमीन की तलाश में वन्यजीव आबादी में पहुंच गया और कई हमले किए। 
Tigers in sugarcane farms monitored through drone cameras in Lakhimpur kheri
वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार - फोटो : अमर उजाला
मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं और रोकथाम और विभागीय कार्यो की समीक्षा को पहुंचे वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार ने भी जंगल में बाढ़ का पानी होने की पुष्टि की। सवालों के जवाब में बताया कि वन्यजीव सूखी जमीन की तलाश में बाहर आ रहे हैं। बाढ़ का पानी जंगल में भर गया था। उधर, बाघों की आबादी भी बढ़ी है। इस वजह से अन्य जानवर भी आबादी में आ गए हैं। वन विभाग के अधिकारी भी बाढ़ को ही प्रमुख वजह बता रहे हैं।
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Tigers in sugarcane farms monitored through drone cameras in Lakhimpur kheri
कैमरे में कैद हुई बाघ की तस्वीर - फोटो : वन विभाग
निर्धारित दायरे में पहुंचने पर हमला करते बाघ
डब्ल्यू डब्ल्यू एफ के दाबीर हसन का कहना है कि जिले में वन्यजीवों के हमले की घटनाएं सामान्य घटनाएं हैं। कोई भी असामान्य घटना नहीं है। बाघ को जंगल से निकलकर गन्ने के खेतों में अच्छा प्रवास मिल रहा है। जंगल से सटे ही गन्ने के खेत हैं। गन्ने की फसल भी काफी क्षेत्रफल में है। 
 
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Tigers in sugarcane farms monitored through drone cameras in Lakhimpur kheri
ड्रोन से कराई जा रही निगरानी - फोटो : अमर उजाला

अगर किसी गन्ने के खेत में बाघ है और कोई उसके के प्रवास के 50 से 60 मीटर के निर्धारित दायरे में पहुंच जाता है तब बाघ उस पर हमला कर देता है। इमलिया गांव की घटना में भी युवक गन्ने के खेत में बाघ के समीप पहुंच गया था। कुछ समय पहले बांकेगंज इलाके में बच्ची को मारने की घटना भी कुछ इसी तरह की है। 

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