बदायूं में हिंदुस्तान पेट्रोलियम प्लांट में मुख्य प्रबंधक (परियोजना) सुधीर गुप्ता और उप प्रबंधक हर्षित मिश्रा की हत्या में बड़ा खुलासा हुआ है। फरवरी में जानलेवा हमले के बाद पुलिस के कार्रवाई न करने और राजनैतिक दबाव में काम करने को लेकर मुख्य प्रबंधक (परियोजना) सुधीर गुप्ता ने सेवानिवृत्ति से पांच साल पहले ही नौकरी छोड़ने का फैसला ले लिया था। वीआरएस स्वीकृत होने के बाद उन्हें 31 मार्च तक ही यहां प्लांट पर काम करना था। इसके बाद उन्होंने घर जाने की तैयारी कर ली थी।
सुधीर गुप्ता नोएडा के सेक्टर 50 के सिल्वर एस्टेट अपार्टमेंट के रहने वाले थे। कंपनी में काम करते हुए जानलेवा हमला होने व लगातार धमकियां मिलने के बाद सुधीर गुप्ता लगातार पुलिस से शिकायत कर रहे थे।
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आरोपी मुठभेड़ में घायल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आरोप है कि पुलिस आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। वीआरएस स्वीकृत होने के बाद सुधीर गुप्ता के स्थान पर मुंबई से नए अधिकारी की तैनाती भी कर दी गई थी। बताया जा रहा है कि नए मुख्य प्रबंधक बृहस्पतिवार को प्लांट देखने के लिए आ रहे थे।
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मृतक सुधीर गुप्ता की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस के मुताबिक इन सभी बातों की जानकारी अजय प्रताप को हो गई थी। उसने 19 दिन पहले ही सुधीर गुप्ता का कत्ल कर दिया। नए अधिकारी को सुधीर गुप्ता के मर्डर की जानकारी मिली तो वह प्लांट तक नहीं आए और रास्ते से ही वापस लौट गए।
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आरोपी अजय प्रताप सिंह की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्लांट में नौकरी लगवाने के नाम पर उगाही करता था आरोपी
हत्यारोपी अजय प्रताप सिंह का क्षेत्र में भय व्याप्त है। उसके सामने कोई बोलने को तैयार नहीं होता है। प्लांट में उसके मर्जी के बिना कोई नौकरी नहीं कर सकता था। जो रुपये नहीं देता था, उसकी शिकायतें कराकर वह नौकरी से बाहर निकलवा देता था।
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एचपीसीएल प्लांट में दोहरे हत्याकांड के बाद बाहर मौजूद लोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ऐसे ही एक व्यक्ति को नौकरी से निकलवाने के बाद से दोनों अधिकारियों के नजर में आ गया था। इसके बाद से उसके कहने से न कोई कर्मचारी लगाया जा रहा था और न ही उसके कहने पर किसी को लगाया जा रहा था।