भाजपा का मजबूत गढ़ बन चुकी बरेली मंडल और उसके आसपास की सात सीटों में इस बार समीकरण बदले हैं। बरेली, बदायूं और पीलीभीत में पुराने दिग्गजों को नजरअंदाज कर भाजपा ने नए चेहरों पर दांव लगाया है। इसमें नए चेहरों के सामने इस मजबूत गढ़ को बचाने के साथ ही पार्टी के विश्वास पर खरे उतरने की चुनौती है।
लोकसभा चुनाव: नए चेहरों को गढ़ और पुरानों को वर्चस्व बचाने की चुनौती, इन सीटों पर दिलचस्प होगा चुनावी रण
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बरेली मंडल और आसपास की सात लोकसभा सीट की तीन पुराने चेहरों में कई हैट्रिक के कगार पर हैं और उनके सामने अपने ही प्रदर्शन को बेहतर कर वर्चस्व बचाने की चुनौती है। फिलहाल पार्टी ने पुराने समीकरणों के आधार पर प्रत्याशियों का चयन किया है। बरेली से संतोष गंगवार की जगह पर पूर्व मंत्री छत्रपाल गंगवार को मौका दिया है। इसमें जातीय समीकरण को उसी आधार पर साधने की कोशिश हुई है।
टिकट नहीं मिलने वालों के रुख पर नजर
आठ बार सांसद रहे संतोष गंगवार अपनी उम्र की बाधा की वजह से टिकट की रेस से बाहर हुए। हालांकि उन्होंने अब तक पार्टी लाइन पर रहकर ही अपना रुख स्पष्ट किया है। उधर, बदायूं सांसद संघमित्रा मौर्य ने भी उनकी जगह पर प्रत्याशी बने शाक्य को सोशल मीडिया पर बधाई देकर अपनी नाराजगी जाहिर नहीं होने दी। पीलीभीत में भी दो बार के सांसद रहे वरुण गांधी ने चुप्पी साधकर पार्टी की सहानुभूति हासिल की है। ऐसे में टिकट कटने वालों के रुख पर भी पार्टी की नजर होगी।
मुस्लिम मतों को साधने के लिए बसपा ने बदायूं, पीलीभीत सहित कई सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। सपा भी मुस्लिम मतों पर भरोसा कर रही है और हिन्दू मतों में सेंधमारी करने की कोशिश में है। ऐसे में बसपा के प्रदर्शन भी काफी हद तक परिणाम निर्भर होगा।