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बदायूं कांड: घर में 18 घंटे तक पड़ा रहा शव, परिजन कहते रहे दुष्कर्म हुआ है, पुलिस बोली- हादसा है!
Thu, 07 Jan 2021 01:47 PM IST
प्राची प्रियम
उमेश राठौर, बदायूं
उमेश राठौर, बदायूं
Published by: प्राची प्रियम
Updated Thu, 07 Jan 2021 01:47 PM IST
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बदायूं कांड
- फोटो : अमर उजाला
बदायूं में हुए सामूहिक दुष्कर्म के बाद महिला की हत्या के मामले में पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हर तरफ बदायूं पुलिस की निंदा हो रही है। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस पहले ही परिजन की बात मान लेती और मामले को गंभीरता से लेती तो आरोपी तभी पकड़े जाते और पुलिस की इतनी फजीहत भी न होती।
badaun case
- फोटो : अमर उजाला
मगर मामले को लेकर पुलिस इतनी लापरवाह बनी रही कि महिला का शव 18 घंटे घर में पड़ी रही और पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, बल्कि आरोपियों के ही सुर में सुर मिलाती रही और घटना को हादसा बताते हुए पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश में जुटी रही। वहीं परिजन चीख-चीखकर दुष्कर्म के बाद हत्या की बात कहते रहे। मंगलवार को जब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई तब तक अधिकारी भी घटना को हादसा ही बताते रहे। अब मामला सुर्खियों में आया तो पुलिस आरोपियों पर रासुका लगाने की बात कह रही है।
badaun case
- फोटो : अमर उजाला
रविवार शाम करीब पांच बजे 45 वर्षीय महिला नजदीकी गांव के धर्मस्थल पर गई थी। उस दिन बूंदाबांदी हो रही थी। परिवार के लोग घर में मौजूद थे। रात साढ़े 11-12 बजे के बीच अचानक दरवाजे पर एक बोलेरो आकर रुकी, जिसमें धर्मस्थल का पुजारी सत्यनारायण दास, वेदराम और यशपाल सवार थे। उन्होंने महिला के अर्धनग्न शव को घर के बाहर डाल दिया और गाड़ी दौड़ाकर ले गए। जब परिवार वालों ने उन्हें जाते हुए और महिला के शव को देखा तो उनके होश उड़ गए।
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badaun case
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने सबसे पहले पुलिस को सूचना दी। रात भर शव घर में रखा रहा, लेकिन पुलिस नहीं आई। दूसरे दिन सोमवार को दोपहर बाद तक परिवार वालों ने पुलिस का इंतजार किया, लेकिन पुलिस फिर भी नहीं पहुंची। इसके बाद यूपी 112 को सूचना दी गई। इसके बावजूद थाना पुलिस समय पर नहीं आई। शाम करीब छह बजे एक दरोगा और दो सिपाही गांव पहुंचे, तब कहीं 18 घंटे बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
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बदायूं पहुंचीं राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य
- फोटो : ANI
तब तक आरोपी गांव में थे, पुलिस कह रही थी कि महिला कुएं में गिरकर घायल हुई है, जबकि उसके प्राइवेट पार्ट में ठूंसा गया कपड़ा और रुई साफ गवाही दे रहे थे कि उसके साथ हैवानियत हुई है, इसके बावजूद इंस्पेक्टर राघवेंद्र प्रताप सिंह पुजारी के सुर में सुर मिला रहे थे। उनका कहना था कि उन्होंने महिला कांस्टेबल से शव दिखवा लिया है, शरीर पर कोई चोट का निशान नहीं है। हैरानी की बात ये रही कि उच्चाधिकारी के बोल भी यही रहे।