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Bahraich Violence: 'तकरार नहीं, हम तो अमन के तलबगार हैं...' बहराइच में मोहम्मद अली को देवी मंदिर की जिम्मेदारी
Wed, 16 Oct 2024 03:21 PM IST
शाहरुख खान
अभिषेक राज श्रीवास्तव, अमर उजाला, बहराइच
अभिषेक राज श्रीवास्तव, अमर उजाला, बहराइच
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 16 Oct 2024 03:21 PM IST
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Bahraich violence
- फोटो : अमर उजाला
सभी के दीप सुंदर हैं हमारे क्या तुम्हारे क्या।
Bahraich violence
- फोटो : अमर उजाला
सद्भाव की मिसाल बहराइच में हर मौके पर दिखती है। सरयू और राप्ती के निर्मल जल से बाबा सिद्धनाथ का जलाभिषेक होता है तो बहराइच दरगाह शरीफ में इसी पावन जल से जायरीन वजू भी करते हैं। दुर्गापूजा और ईद भी सभी मिलकर मनाते हैं। लेकिन इस बार किसी की बुरी नजर लग गई। अब उस नजर को उतारने की बारी है।
सद्भाव ही वह खास बात है, जिसकी बदौलत कभी चीनी यात्री ह्वेनसांग और फाह्यान ने अपने यात्रा वृतांत में बहराइच को सराहा। इब्ने-बतूता ने भी अपने बहराइच का बखान किया और यहां के बारे में लिखा भी। इस स्वर्णिम अतीत पर हिंसा की यह मनहूस कालीख ठीक नहीं।
सद्भाव ही वह खास बात है, जिसकी बदौलत कभी चीनी यात्री ह्वेनसांग और फाह्यान ने अपने यात्रा वृतांत में बहराइच को सराहा। इब्ने-बतूता ने भी अपने बहराइच का बखान किया और यहां के बारे में लिखा भी। इस स्वर्णिम अतीत पर हिंसा की यह मनहूस कालीख ठीक नहीं।
Bahraich violence
- फोटो : अमर उजाला
यहां से सौहार्द का संदेश भी
बहराइच दरगाह शरीफ
मजहब के नाम पर माहौल खराब करने वालों के लिए बहराइच दरगाह शरीफ किसी मिसाल से कम नहीं है। यहां एक साथ हिंदू व मुस्लिम मिलकर सजदा करते हैं। मन्नत पूरी होने पर चादरपोशी की रश्म भी निभाते हैं। जलसे में शिरकत करते हैं। जेठ के मेले में तो यहां की रंगत देखते ही बनती है। कुछ यही हाल बड़े पुरुष की मजार का भी है।
बहराइच दरगाह शरीफ
मजहब के नाम पर माहौल खराब करने वालों के लिए बहराइच दरगाह शरीफ किसी मिसाल से कम नहीं है। यहां एक साथ हिंदू व मुस्लिम मिलकर सजदा करते हैं। मन्नत पूरी होने पर चादरपोशी की रश्म भी निभाते हैं। जलसे में शिरकत करते हैं। जेठ के मेले में तो यहां की रंगत देखते ही बनती है। कुछ यही हाल बड़े पुरुष की मजार का भी है।
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Bahraich violence
- फोटो : अमर उजाला
मोहम्मद अली को देवी मंदिर की जिम्मेदारी
धर्म के नाम पर लड़ने वालों को महसी तहसील के ही घुरहरीपुर गांव निवासी मोहम्मद अली का पैगाम समझना होगा। यहां की माता घूर देवी के प्राचीन मंदिर में सभी धर्म के लोग शीश नवाते हैं। इसकी देख-रेख मोहम्मद अली ही करते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर जर्जर अवस्था में था, लेकिन जब से मोहम्मद अली ने मंदिर की अध्यक्षता संभाली उसके बाद से मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ। इसके लिए वह गांव से लेकर शहर तक चंदा इकट्ठा किए। उन्होंने अयोध्या की हनुमानगढ़ी की तर्ज पर बजरंगबली का भव्य मंदिर भी बनवाया है। नवरात्र के समय मुस्लिम महिलाएं भी पहुंचकर मां घूर देवी की पूजा करती हैं। यहां की तनरन्नुम कहती हैं कि जब अपनी मन्नत पूरी होने पर हिंदू समुदाय के लोग दरगाह शरीफ पर चादर चढ़ाने से नहीं कतराते तो हम अपनी मुराद पूरी करने के लिए मंदिर में पूजा क्यों नहीं कर सकते।
धर्म के नाम पर लड़ने वालों को महसी तहसील के ही घुरहरीपुर गांव निवासी मोहम्मद अली का पैगाम समझना होगा। यहां की माता घूर देवी के प्राचीन मंदिर में सभी धर्म के लोग शीश नवाते हैं। इसकी देख-रेख मोहम्मद अली ही करते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर जर्जर अवस्था में था, लेकिन जब से मोहम्मद अली ने मंदिर की अध्यक्षता संभाली उसके बाद से मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ। इसके लिए वह गांव से लेकर शहर तक चंदा इकट्ठा किए। उन्होंने अयोध्या की हनुमानगढ़ी की तर्ज पर बजरंगबली का भव्य मंदिर भी बनवाया है। नवरात्र के समय मुस्लिम महिलाएं भी पहुंचकर मां घूर देवी की पूजा करती हैं। यहां की तनरन्नुम कहती हैं कि जब अपनी मन्नत पूरी होने पर हिंदू समुदाय के लोग दरगाह शरीफ पर चादर चढ़ाने से नहीं कतराते तो हम अपनी मुराद पूरी करने के लिए मंदिर में पूजा क्यों नहीं कर सकते।
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Bahraich violence
- फोटो : अमर उजाला
शांति ही हमारी पहचान है
बहराइच की पहचान शांति और सौहार्द ही रही है। हमें इसे कायम रखना है। अगर कुछ लोग गलत कर रहे हैं तो उन्हें सजा मिलेगी। लेकिन अब जरूरत शांति की है। सद्भाव की है। सहयोग की है।
ओमप्रकाश तिवारी, महंत संघारिणी मंदिर
बहराइच की पहचान शांति और सौहार्द ही रही है। हमें इसे कायम रखना है। अगर कुछ लोग गलत कर रहे हैं तो उन्हें सजा मिलेगी। लेकिन अब जरूरत शांति की है। सद्भाव की है। सहयोग की है।
ओमप्रकाश तिवारी, महंत संघारिणी मंदिर