शहीद अभिनव चौधरी का पार्थिव शरीर शनिवार को उनके पैतृक गांव पुसार पहुंचा तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। अभिनव के अंतिम दर्शन करने के बाद पूरा गांव रो पड़ा। इस दौरान हर किसी की जुबां पर यही बात थी कि परिवार का लाडला बेटा चला गया। वहीं हजारों की संख्या में मौजूद ग्रामीण भारत माता की जय और शहीद अभिनव चौधरी अमर रहे के जयकारे लगाते रहे। ताऊ सूबे सिंह ने अपने लाडले भतीजे की चिता को फफकते हुए मुखाग्नि दी।
पैतृक पुसार गांव में शनिवार को जैसे ही शहीद अभिनव का पार्थिव शरीर पहुंचा तो देखने वालों की भीड़ लग गई। इस दौरान पूरा गांव शहीद अभिनव चौधरी अमर रहे के जयकारों से गूंज रहा था। वहीं घर पर कुछ देर के लिए अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर को रखा गया। ग्रामीणों ने देश के सपूत को पुष्प अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। वहीं अंतिम यात्रा में ग्रामीण पुष्प वर्षा करते और उद्घोष करते हुए चल रहे थे। गांव के श्मशान में सैनिक सम्मान के साथ अभिनव चौधरी को अंतिम विदाई दी गई।
बारिश में खराब हुए श्मशान के रास्ते को ग्रामीण ठीक किया
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शहीद अभिनव चौधरी का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
- फोटो : amar ujala
गमगीम माहौल के बीच ही ग्रामीण अभिनव के अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटे थे। जिले में दो दिन पहले हुई तेज बारिश से पुसार गांव में श्मशान जाने वाला रास्ता भी काफी खराब हो गया था। शुक्रवार को जब अभिनव की मृत्यु और उनका अंतिम संस्कार पुसार में होने की जानकारी मिली तो ग्रामीण फावड़े से रास्ते को ठीक करने में जुट गए। एसडीएम दुर्गेश मिश्रा गांव पहुंचे और शोकाकुल परिजनों को सांत्वना दी। जिलाधिकारी राजकमल यादव ने फोन पर बात करके परिजनों को ढांढस बंधाया।
जाट महासभा ने जताया शोक
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शहीद अभिनव चौधरी का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
- फोटो : amar ujala
जिला जाट महासभा ने अभिनव की शहादत पर शोक व्यक्त किया है। संगठन के सदस्यों ने ऑनलाइन बैठक कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मीडिया प्रभारी गजेंद्र पायल ने बताया कि अभिनव होनहार थे। बैठक में संगठन अध्यक्ष सत्यवीर सिवाच, पूर्व अध्यक्ष चौधरी कल्याण सिंह, कर्नल एसएस दूहून, रवींद्र मलिक, सतेंद्र पंवार, डीके बालियान, पवन तोमर, ब्रजपाल सिंह, विनोद कुश, हरबीर सिंह सुमन मौजूद रहे।
15 मई को मेरठ आना चाहते थे अभिनव, कोरोना के कारण पिता ने रोक दिया था
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शहीद अभिनव चौधरी काओ सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
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स्क्वाड्रन लीडर अभिनव चौधरी 15 मई को छुट्टी मिलने पर मेरठ आना चाहते थे, इस संबंध में उनकी पिता सतेंद्र से बात हुई थी। लेकिन पिता ने कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते आने से मना कर दिया था। इसके बाद अब 13 जून को घर आने की बात हुई थी। पिता सतेंद्र का कहना है कि बुधवार को फोन पर उससे आखिरी बार बात हुई थी। एक-दूसरे का हालचाल पूछा था। लेकिन तब अंदाजा नहीं था कि ये बातचीत आखिरी होगी।
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अभिवन चौधरी का अंतिम संस्कार किया गया।
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शुक्रवार सुबह चार बजे वायुसेना के सीओ का फोन आया, उन्होंने विमान हादसे में अभिनव के शहीद होने की जानकारी दी। इसके बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। काश वह 15 मई को आ गए होते तो हादसे से बच सकते थे। इकलौते बेटे के चले जाने के गम में माता पिता के आंसू रुक नहीं रहे हैं। वह बेहद मिलनसार थे, आसपास के लोग व सभी रिश्तेदार उन्हें पसंद करते हैं। पिता सतेंद्र चौधरी ने बताया कि सितंबर 2020 में अभिनव आखिरी बार घर आया था। तब सभी रिश्तेदार व दोस्तों की खैर-खबर ली थी। अभिनव के परिजनों ने बताया अभिनव में देशभक्ति को लेकर अलग ही जुनून था। वो अक्सर व्हाट्सएप स्टेट्स पर देशभक्ति से संबंधित सामग्री पोस्ट करते थे। पड़ोस में रह रहे डॉ. विकास तोमर ने बताया कि अभिनव बचपन से ही बेहद होनहार थे। जब तक किसी चीज को सीख नहीं लेते थे, तब तक छोड़ते नहीं थे। उनकी बेटी ने बताया कि भैया बेहद प्रोत्साहन करते थे। कॅरियर को लेकर जरूरी बातें बताते थे।